बेतला (लातेहार). झारखंड के अतिमहत्वाकांक्षी उत्तर कोयल जलाशय परियोजना (मंडल डैम) के डूब क्षेत्र में हालात बद से बदतर हो गये हैं. प्रभावित ग्रामीण भारी विवशता के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं. बाढ़ और बैकवाटर का पानी घरों में घुसने के बाद भजना, कुटकू, चेमो और सनेया के लोग परेशान हैं. इनमें सबसे अधिक प्रभावित भजना गांव के लोग अपने गृहस्थी के सभी सामानों, मवेशियों और जरूरी चीजों को समेटकर नजदीकी पहाड़ी पर शरण लिए हुए हैं. ग्रामीणों के सामने सिर छुपाने और सामान को सुरक्षित रखने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
राहत सामग्री पहुंचाना भी हुआ मुश्किल
डैम का पानी बहुत धीमी गति से कम होने और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रबंधन पूरी तरह सतर्कता बरत रहा है. बेघर हो चुके लगभग 36 परिवारों को फिलहाल मतगड़ी इलाके में बने अस्थाई टेंटों में रखा गया है. ये लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में टेंटों के भीतर दिन काटने को विवश हैं. लगातार हो रही बारिश और मुख्य रास्ते पूरी तरह बंद होने से इन पहाड़ी इलाकों और टेंटों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी प्रशासन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
जिला मुख्यालय से संपर्क टूटा
झारखंड के लातेहार और पलामू जिले की सीमा पर स्थित इस डैम के जलग्रहण क्षेत्र में अभी भी 40 फीट से ज्यादा पानी जमा है. हालांकि बारिश थमने से उत्तरी कोयल नदी के जलस्तर में मामूली कमी आई है, लेकिन मंडल डैम तक पहुंचने वाले सभी मुख्य मार्ग और रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हैं. इससे प्रभावित इलाकों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे ग्रामीण पूरी तरह अलग-थलग पड़ गये हैं.
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नेटवर्क फेल होने से सूचनाओं का आदान-प्रदान ठप
क्षेत्र में मोबाइल और संचार नेटवर्क पूरी तरह फेल हो जाने के कारण संकट और गहरा गया है. पहाड़ों और टेंटों में फंसे लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. अंदरूनी इलाकों की सटीक जानकारी न मिलने से ग्रामीण अपनों की कुशलता जानने और प्रशासन तक अपनी मदद की गुहार पहुंचाने के लिए भी तरस रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि जब तक रास्ते नहीं खुलते और मलबा साफ नहीं होता, तब तक ग्रामीणों को ऊंचे व सुरक्षित स्थानों पर ही टिके रहने की सलाह दी गयी है.
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पानी में तैर रहे हैं पेड़ और कचरा
बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने का मुख्य कारण डैम के मुहाने पर भारी मात्रा में गाद, कचरा और जंगलों से बहकर आई लकड़ियों का फंसना था. ताजा स्थिति यह है कि प्रशासन द्वारा इस मलबे को अभी तक हटाया नहीं जा सका है. डैम के पानी में भारी मात्रा में कचरा साफ तौर पर तैरते हुए दिखाई दे रहे हैं. इस मलबे के कारण पानी की प्राकृतिक निकासी अभी भी बाधित है, जिससे जलस्तर उम्मीद के मुताबिक नीचे नहीं आ पा रहा है.
