लोहरदगा़ सदर प्रखंड के कूटमु में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान क्षेत्र के ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं और जिला प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग की. ग्रामीणों की प्रमुख मांग बमनडीहा-कचहरी मोड़ भाया कूटमु सड़क के निर्माण की रही, जो तीन प्रखंडों सदर, किस्को और पेशरार को जोड़ती है. लोगों ने कहा कि यह सड़क ग्रामीण इलाकों की लाइफ लाइन है, लेकिन अब इसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है. लोगों रोष व्यक्त करते हुए कहा कि शहर से सटे और जिला मुख्यालय से आधे किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुटुमु गांव का सर्वांगीण विकास नहीं हो सका है. नगर परिषद द्वारा भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे : ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो गया है. यह मार्ग न केवल स्थानीय लोगों बल्कि भारी वाहनों, खासकर बॉक्साइट ट्रकों और हिंडालको कंपनी के लोडेड वाहनों का मुख्य रास्ता है. लेकिन इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण के प्रति कंपनी और प्रशासन दोनों ही उदासीन हैं. लोगों ने बेबाकी से अपनी समस्याओं को प्रभात खबर के साथ साझा करते हुए समस्या का त्वरित निदान करने की मांग की. प्रशासन को ग्रामीणों की परेशानियों की कोई परवाह नहीं : कार्यक्रम में कूटमु निवासी अनुज उरांव ने कहा कि बमनडीहा-कचहरी मोड़ भाया कूटमु रोड से तीन प्रखंडों का आवागमन होता है, परंतु इसकी दुर्दशा देखकर लगता है कि प्रशासन को ग्रामीणों की परेशानियों की कोई परवाह नहीं. मरम्मत के अभाव में सड़क पूरी तरह बेकार : वार्ड नंबर चार निवासी पवन प्रभात ने बताया कि यह सड़क जिला मुख्यालय से मात्र 2000 मीटर दूर है और 2009-10 में ग्रामीण विकास कार्य प्रमंडल लोहरदगा द्वारा इसका निर्माण कराया गया था. परंतु मरम्मत के अभाव में सड़क पूरी तरह बेकार साबित हो रही है. बॉक्साइट ट्रकों के आवागमन से इसकी स्थिति और बिगड़ गयी : जमील अंसारी ने कहा कि सड़क पर रोजाना बॉक्साइट ट्रकों के आवागमन से इसकी स्थिति और बिगड़ गयी है. न जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया, न ही अधिकारियों ने. अब यह सड़क दुर्घटना को आमंत्रण देने लगी है. सीएसआर नीति के तहत हिंडालको को जिम्मेदारी निभानी चाहिए : रबिंद्र भगत ने बताया कि दो किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 100 फीट की दूरी भी बिना गड्ढों के तय करना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि हिंडालको कंपनी की बसें और ट्रक इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन कंपनी ने कभी सड़क मरम्मत की जिम्मेदारी नहीं ली. जबकि सीएसआर नीति के तहत कंपनी को खनन क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने प्रभात खबर की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच के माध्यम से अब उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचेगी.
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