किस्को से रामप्रसाद पाल की रिपोर्ट
लोहरदगा जिले से 30 किमी दूर स्थित बसा पीर टोंगरी शिव-पार्वती मंदिर. प्रकृति की गोद में बसे पहाड़, नुकीले पत्थरों से बना पथरीला रास्ता और 500 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शिव-पार्वती की जोड़ी, यह नजारा हिसरी पंचायत के पीर टोंगरी स्थित मंदिर का है.
यह आस्था का केंद्र है यह मंदिर
इस मंदिर में लोग दूर-दूर से भगवान भोले नाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद लेने आते हैं.मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जो भी मुराद मांगी जाती है, भगवान शिव और माता पार्वती उसे जरूर पूरी करते हैं.
2016 में प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ था शिवलिंग
ग्रामीणों के अनुसार इस स्थान पर वर्ष 2016 में प्राकृतिक रूप से शिवलिंग प्रकट हुआ था. धीरे-धीरे लोगों की आस्था इससे जुड़ती गयी और ग्रामीणों ने यहां मंदिर का निर्माण शुरू किया. आज यह स्थान दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र बन चुका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि माता पार्वती यहां वर्षों से विराजमान हैं, जबकि भगवान शिव का शिवलिंग कुछ साल पहले ही प्रकट हुआ था.
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कठिन चढ़ाई और भक्तों की भारी भीड़
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है. पहाड़ की चढ़ाई के साथ-साथ जगह-जगह नुकीले पत्थर हैं, लेकिन भक्तों की अटूट आस्था के आगे यह कठिनाई भी छोटी पड़ जाती है. लोहरदगा मुख्यालय से 30 किलोमीटर एवं हिसरी पंचायत से पांच किलोमीटर दूर स्थित इस स्थल पर सावन के महीने और महाशिवरात्रि के दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. लोहरदगा और गुमला सहित आसपास के कई जिलों से लोग पैदल चलकर यहां दर्शन के लिए आते हैं.
बुनियादी सुविधाओं की मांग
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने दर्शन स्थल के बाहर पेयजल और बिजली की व्यवस्था करायी है ताकि रात में भी भक्त आसानी से दर्शन कर सकें. पहाड़ के ऊपर से नीचे का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है. ग्रामीणों की मांग है कि यदि सरकार इस मंदिर के विकास में सहयोग करे, तो पक्के रास्ते, शौचालय और विश्राम स्थल जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलने से भक्तों को और सहूलियत होगी. यह स्थल पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद खास है.
