कुड़ू़ प्रखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) अपनी चमक खोता जा रहा है. 14 पंचायतों में निबंधित कुल 23,486 जॉब कार्ड धारकों में से एक तिहाई को भी साल में 100 दिन का रोजगार नहीं मिल सका है. आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 31 मार्च तक मात्र 585 परिवारों को ही पूर्ण रोजगार मिला, जबकि 1000 कार्ड धारक 90 से 95 दिनों के कार्य तक सिमट कर रह गये. चंदलासो अव्वल, पंडरा पंचायत फिसड्डी : रोजगार उपलब्ध कराने में चंदलासो पंचायत सबसे आगे रही, जहां 88 जॉब कार्ड धारकों को 100 दिन और 76 को 95 दिनों का काम मिला. इसके विपरीत पंडरा पंचायत की स्थिति सबसे दयनीय रही, जहां साल भर में महज एक व्यक्ति को ही 100 दिनों का रोजगार नसीब हुआ. प्रखंड में कुल 43,362 परिवारों में से 9,876 अनुसूचित जनजाति, 1,375 अनुसूचित जाति और 10,038 अन्य वर्ग के जॉब कार्ड धारी हैं. पलायन की राह पर मजदूर : गांवों में काम की कमी और समय पर मजदूरी नहीं मिलने के कारण मजदूरों का भरोसा योजना से उठता जा रहा है. नतीजा, आजीविका की तलाश में मजदूरों का अन्य प्रदेशों की ओर पलायन करना नियति बन गयी है. कर्मियों की हड़ताल से ठप पड़ा काम : अपनी मांगों को लेकर 12 मार्च से मनरेगाकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. बीपीओ निलेंद्र कुमार, लेखा सहायक सुमति कुमारी समेत सभी रोजगार सेवकों के हड़ताल पर जाने से रोजगार सृजन पूरी तरह बाधित है. प्रभारी बीडीओ सह सीओ संतोष उरांव ने बताया कि मनरेगा के सुचारू संचालन के लिए सभी पंचायत सचिवों को कड़े निर्देश दिये गये हैं.
23 हजार जॉब कार्ड धारकों में महज 585 को मिला 100 दिनों का काम
23 हजार जॉब कार्ड धारकों में महज 585 को मिला 100 दिनों का काम
