झारखंड बजट 2026 पर मिली-जुली प्रतिक्रिया, सत्तापक्ष ने सराहा तो विपक्ष ने बताया आईवाश

झारखंड बजट 2026 पर मिली-जुली प्रतिक्रिया, सत्तापक्ष ने सराहा तो विपक्ष ने बताया आईवाश

लोहरदगा़ झारखंड सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किये गये वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर लोहरदगा के विभिन्न वर्गों से तीखी और सकारात्मक दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. एक लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये के इस बजट को लेकर जहां सत्ताधारी दल इसे आर्थिक कायाकल्प का रोडमैप बता रहे हैं, वहीं व्यापारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाये हैं. बजट के पक्ष में उठी आवाजें : झामुमो नेता जय प्रकाश शर्मा ने इसे अबुआ दिशोम बजट बताते हुए कहा कि यह अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने वाला रोडमैप है. युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अभिनव सिद्धार्थ ने बजट को संतुलित बताते हुए महिला किसान खुशहाली योजना और मंईयां सम्मान योजना के विस्तार की सराहना की. उन्होंने कहा कि जहां देश में सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, वहीं हेमंत सरकार 100 नये सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस खोल रही है. अभिभावक मंच के संजय सर्राफ ने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा आज सदन में प्रस्तुत वार्षिक बजट 2026 को राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक मिला-जुला लेकिन सकारात्मक प्रयास कहा जा सकता है. बलदेव साहू महाविद्यालय के प्रिंसिपल शशि गुप्ता ने भी शिक्षा और कृषि क्षेत्र में किये गये प्रावधानों को राज्य की मजबूती के लिए सकारात्मक कदम बताया. चुनौतियां और विरोध के स्वर : दूसरी ओर, लोहरदगा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रितेश कुमार ने बजट को आईवाश करार देते हुए कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए इसमें कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. पूर्व अध्यक्ष राजेश महतो ने कहा कि योजनाओं की घोषणा से ज्यादा जरूरी उनका धरातल पर उतरना है. सर्राफा व्यवसायी संजय बर्मन ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा चरमरा गया है और यह बजट महज एक खानापूर्ति है. उनके अनुसार, जब राज्य में पेंशन और नियुक्तियों का वादा अधूरा है, तो ऐसे बजट का कोई औचित्य नहीं रह जाता. व्यवसायी रवि खत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि झारखंड पिछले 26 वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहा है, जिसके कारण यहां से बड़े व्यापारियों का पलायन जारी है. सामाजिक कार्यकर्ता मनोज कुमार गुप्ता मन्ना ने भी इसे केवल लोगों को लुभाने वाला बजट बताया. कुल मिलाकर, शहर में चर्चा है कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम हुआ, तभी इस भारी-भरकम आवंटन का लाभ आम जनता तक पहुंच पायेगा.

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Published by: Shailesh ambashtha

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