लोहरदगा़ होप कार्यालय छत्तर बगीचा के सभागार में एकदिवसीय सेमिनार आदिवासी भाषा और संस्कृति के संरक्षण बिषय पर होप और फिमी के सहयोग से किया गया. अपनी विशिष्ट जीवनशैली, प्रकृति के प्रति प्रेम और समृद्ध कला-परंपरा के लिए जानी जाने वाली आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए होप के द्वारा एक नए अभियान की शुरुआत किया गया है.इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की लुप्तप्राय कलाओं, भाषाओं, पारंपरिक औषधियों, और लोकगीत-नृत्यों को दस्तावेज़ी रूप देना है. तेजी से बदलती आधुनिक दुनिया में, आदिवासी समुदाय अपनी भाषा और परंपराओं को सहेजने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं. यह अभियान उन्हें एक मंच प्रदान करेगा ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान हमेशा जीवंत रहे.इस अवसर पर मनोरमा एक्का ने कहा, आदिवासी संस्कृति केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने का एक आदर्श दर्शन है. इसे भावी पीढ़ियों के लिए सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व है. होप सभी कला प्रेमियों, शोधार्थियों और आम जनता से इस सांस्कृतिक धरोहर को समझने और इसके संरक्षण में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील करता है. कार्यक्रम के सफल आयोजन में सेन्हा प्रखंड से आई 30 चयनित प्रतिभागियों के साथ इंदु बखला,प्रीति उरांव,अरविंद वर्मा और उज्जवल कुशवाहा ने प्रमुख भूमिका निभायी.
आदिवासी संस्कृति को सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व
आदिवासी संस्कृति को सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व
