सामाजिक समरसता के लिए जाति, वर्ग, ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटायें

सामाजिक समरसता के लिए जाति, वर्ग, ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटायें

लोहरदगा़ नगर में विजयादशमी उत्सव पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भव्य पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत प्रांत संघालक सच्चिदानंद, प्रांत कुटुंब प्रबोधन संयोजक सकलदेव और नगर कार्यवाह तुलसी उरांव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर तथा शस्त्र पूजन कर की. इसके पश्चात उपस्थित नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया. सकलदेव ने संघ स्थापना का उद्देश्य समझाते हुए कहा कि 1925 में नागपुर के मोहितेवाड़ा में डॉ हेडगेवार द्वारा संघ की स्थापना की गयी थी. उन्होंने बताया कि संघ की नि:स्वार्थ सेवा और व्यक्ति निर्माण कार्य से प्रभावित होकर लोग तेजी से जुड़ रहे हैं. संघ शताब्दी वर्ष में पांच बिंदुओं परिवार सुदृढ़ीकरण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी उत्पादों का प्रयोग, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य पर सर्वत्र चर्चा कर रहा है. उन्होंने कुटुंब प्रबोधन कार्य के माध्यम से समाज के सभी वर्गों में आपसी सौहार्द और पारिवारिक मूल्य बढ़ाने का महत्व बताया. उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए जाति, वर्ग, ऊंच-नीच, दलित-पीड़ित, वंचित आदि के भेदभाव को मिटाना आवश्यक है, जिससे संपूर्ण हिंदू समाज में सामंजस्य स्थापित हो. सकलदेव ने स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग को भी आवश्यक बताया और कहा कि नागरिक अपनी दैनिक जीवन की सामग्री में स्वदेशी का उपयोग करें. पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पेड़ लगाना, पानी बचाना और प्लास्टिक कम करना सभी का कर्तव्य है. अंत में उन्होंने नागरिक कर्तव्यों और अधिकारों की अहमियत बतायी और कहा कि संविधान के सिद्धांतों का पालन सतत कर हम समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकते हैं.

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By SHAILESH AMBASHTHA

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