19 साल से देवी मंडप बाजारटांड़ में हो रही दुर्गा पूजा

19 साल से देवी मंडप बाजारटांड़ में हो रही दुर्गा पूजा

कुड़ू़ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः. नवरात्र के आगमन के साथ ही कुड़ू प्रखंड में दुर्गा पूजा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गयी है. शहरी व ग्रामीण इलाकों में पूजा पंडालों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. प्रखंड का दुर्गा पूजा इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण बाजारटांड़ स्थित देवी मंडप है, जहां पिछले 19 वर्षों से लगातार भव्य दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है. यहां की खासियत यह है कि प्रखंड में पहली बार यहीं चलंत प्रतिमा और महिषासुर वध का लाइव प्रसारण किया गया था. यह आयोजन इतना भव्य था कि लोहरदगा, रांची और चंदवा प्रखंड से हजारों की संख्या में श्रद्धालु इसे देखने पहुंचे थे. 2006 में हुई थी शुरुआत : मां भवानी संघ देवी मंडप बाजारटांड़ में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी. झखरा टोला, बाजारटांड़, जामड़ी, बरहनिया और आसपास के गांव के श्रद्धालुओं की बैठक लालमोहन वैद्य की अध्यक्षता में हुई थी. इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि देवी मंडप में हर साल दुर्गा पूजा की जायेगी. श्रद्धालुओं ने सामूहिक सहयोग से जिम्मेदारियां लीं. किसी ने प्रतिमा देने की, किसी ने प्रसाद की व्यवस्था करने की, तो किसी ने साउंड सिस्टम का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली. बैठक में लाल मोहन वैद्य, जगदीश साहू, स्व बुधू साव, विदेशी राम, सीताराम साहू, स्व विमल सिन्हा, कैलाश प्रसाद, ओमप्रकाश फटू, दीपक सोनी, सुजीत वैद्य, आदित्य वैद्य, बुधू राम, रामखेलावन राम, नवीन राम, सीताराम साहू, अजय वर्मा सहित अन्य शामिल हुए. इस दौरान समिति के पहले अध्यक्ष अजय वर्मा बने थे. भगवती जागरण बनी पहचान : साल 2007 में पहली बार यहां भगवती जागरण का आयोजन किया गया. रांची से पहुंची कलाकारों की टोली ने पूरी रात भक्ति गीतों की गंगा बहाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. इसके बाद से हर साल भगवती जागरण और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन परंपरा बन गयी. 2010 में चलंत प्रतिमा और लाइव महिषासुर वध : साल 2010 में यहां पहली बार चलंत प्रतिमा और लाइव महिषासुर वध का मंचन किया गया. महिषासुर की ललकार, मां दुर्गा की सवारी शेर की दहाड़ और उनके वार का प्रसारण इतना आकर्षक था कि लोहरदगा तक इसकी गूंज सुनायी दी. उस वर्ष काफी संख्या में श्रद्धालु रांची जाने के बजाय यहीं पूजा देखने पहुंचे. भव्य पंडाल और विद्युत सज्जा : साल 2011 में हवा महल की तर्ज पर पंडाल बनाया गया. इसके अलावा अयोध्या के राम मंदिर और दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर जैसी भव्य झलकियां भी यहां के पंडालों में देखने को मिलीं. हर साल आकर्षक विद्युत सज्जा और कलात्मक पंडाल निर्माण से श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. इस वर्ष भी बेहतर पंडाल और विद्युत सज्जा की तैयारी चल रही है. समिति का नेतृत्व : मां भवानी संघ दुर्गा पूजा समिति का नेतृत्व समय-समय पर कई लोगों ने किया है. पहले अध्यक्ष अजय वर्मा रहे. इसके बाद प्रदीप ताम्रकार, कैलाश प्रसाद, विपिन कुमार, कुलदीप उरांव और परमेश्वर महतो जैसे लोग अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं. कुल मिलाकर कुड़ू का बाजारटांड़ देवी मंडप दुर्गा पूजा का इतिहास न केवल गौरवशाली रहा है बल्कि यह आज भी श्रद्धालुओं की आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

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By Shailesh ambashtha

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