लोहरदगा़ लोहरदगा जिले में अधिकारियों के पद रिक्त होने से विकास योजनाओं की रफ्तार सुस्त पड़ गयी है. समाहरणालय से लेकर विभिन्न विभागों में अधिकारियों की भारी कमी के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि समाहरणालय में कार्यपालक दंडाधिकारी के स्वीकृत छह पदों में से केवल दो ही पदस्थापित हैं. प्रभारी के भरोसे चल रहे कई अहम विभाग : जिले में एक-दो नहीं, बल्कि एक दर्जन के करीब महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं. इनमें उप निर्वाचन पदाधिकारी, जिला अवर निबंधन पदाधिकारी, समाज कल्याण पदाधिकारी, सामाजिक सुरक्षा सहायक निदेशक, कोषागार पदाधिकारी, भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला लेखा पदाधिकारी, एमबीआइ, डीआरडीए निदेशक और जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जैसे पद शामिल हैं. इन पदों का अतिरिक्त प्रभार अन्य अधिकारियों को सौंपा गया है, जिससे कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. एमबीआइ नहीं होने से फिटनेस व रजिस्ट्रेशन ठप : मोटर यान निरीक्षक (एमबीआइ) का पद खाली होने से वाहन मालिकों की मुसीबतें बढ़ गयी हैं. लोहरदगा-गुमला ट्रक ओनर एसोसिएशन ने इस समस्या को लेकर स्थानीय विधायक रामेश्वर उरांव से गुहार लगायी थी. विधायक ने जल्द समाधान का आश्वासन तो दिया, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं दिखी है. सीएम से करेंगे बात : सांसद : सांसद सुखदेव भगत ने प्रशासनिक ढांचे की इस स्थिति पर चिंता जतायी है. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पदों का रिक्त रहना जिले के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. सांसद ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के लौटते ही वे उनसे मुलाकात कर अधिकारियों की नियुक्ति की मांग करेंगे. उन्होंने दोहराया कि विकास के कार्यों में कोई समझौता नहीं किया जायेगा. जनता पर पड़ रही दोहरी मार : प्रशासनिक अधिकारियों की कमी का सीधा असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है. प्रमाण पत्र बनाने से लेकर विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग तक के काम प्रभावित हैं. अब जिलेवासियों की नजरें सांसद की पहल और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है.
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