बड़की चांपी स्टेशन के नाम पर विवाद, बोर्ड पर पोती कालिख

बड़की चांपी स्टेशन के नाम पर विवाद, बोर्ड पर पोती कालिख

कुड़ू़ रांची-टोरी रेलखंड पर स्थित बड़की चांपी रेलवे स्टेशन के नामकरण का विवाद बुधवार को एक बार फिर हिंसक विरोध के करीब पहुंच गया. रेलवे के निर्देश पर स्टेशन के बोर्ड पर नाम लिखने पहुंचे मजदूरों को कमले गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने घेर लिया. ग्रामीणों ने लिखे गये ””””बड़की चांपी”””” नाम पर कालिख पोत दी और मजदूरों को काम बंद कर वापस लौटा दिया. इसकी सूचना लोहरदगा रेलवे स्टेशन और संबंधित ठेकेदार को दे दी गयी है.15 साल से उलझा है मामला : विदित हो कि 12 नवंबर 2011 को जब इस रेलखंड पर यात्री ट्रेन शुरू हुई थी, तभी से बड़की चांपी और कमले गांव के बीच नाम को लेकर विवाद चल रहा है. रेलवे रिकॉर्ड में स्टेशन का नाम ””””बड़की चांपी”””” दर्ज है और टिकट भी इसी नाम से कटते हैं. वहीं, कमले गांव के ग्रामीणों का तर्क है कि स्टेशन का पूरा निर्माण कमले मौजा की जमीन पर हुआ है, जो सुंदरू पंचायत का हिस्सा है. ग्रामीणों का कहना है कि स्टेशन से बड़की चांपी का कोई भौगोलिक वास्ता नहीं है, इसलिए इसका नाम ””””कमले”””” होना चाहिए. महिला-पुरुषों की भीड़ ने किया विरोध : बुधवार सुबह करीब 11 बजे भंडरा के पझरी निवासी तीन पेंटर बुद्धिमान उरांव, सोनू उरांव और रामधनी उरांव पूर्वी आउटर बोर्ड पर नाम लिख रहे थे. तभी कमले के महिला-पुरुषों की भीड़ वहां पहुंची और विरोध शुरू कर दिया. ग्रामीणों ने बड़की चांपी नाम पर कालिख पोत दी और मजदूरों को काम छोड़ने पर मजबूर कर दिया. मजदूरों ने बताया कि ग्रामीण ””””कमले”””” लिखने का दबाव बना रहे थे, जबकि उन्हें विभाग से ””””बड़की चांपी”””” लिखने का आदेश मिला था. आंदोलन की चेतावनी : ग्राम प्रधान अनिल पहान, शिवशंकर उरांव, निर्मला देवी, अजय साहू, जाबिर अंसारी, विफई उरांव, मांगों उरांव, इस्लाम अंसारी, सुजीत साहू, दुबराज वर्मा, कैशर अंसारी, बसमतिया उरांव, विष्णु मुंड़ा, कुंति उरांव, सोनू उरांव सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने स्टेशन के लिए जमीन दी है, इसलिए नाम उनके गांव का ही होगा. जब तक स्टेशन का नाम कमले नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा. इस संवेदनशील मामले पर रेलवे का कोई भी अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.

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Published by: Shailesh ambashtha

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