लोहरदगाः जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से खनिज अधिनियम 2026 के प्रावधानों के विरोध में जिला कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया. इसमें कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार के फैसले को झारखंड के संवैधानिक और आर्थिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए आंदोलन तेज करने की बात कही.
झारखंड के साथ आर्थिक अन्याय का आरोप
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला झारखंड की जनता के साथ सीधा आर्थिक अन्याय है. इसके खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन लगातार जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण फैसले में राज्यों को खनिजों पर कर लगाने के अधिकार को स्पष्ट किया गया था. इसी आधार पर राज्य सरकार ने कोयला को छोड़कर अन्य खनिजों पर सेस लगाना शुरू किया, जिससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है.
डॉ. उरांव ने कहा कि संघीय व्यवस्था में किसी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले राज्यों से परामर्श किया जाना चाहिए. खनिजों पर कर लगाने का अधिकार राज्यों का संवैधानिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी.
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जल, जंगल और जमीन के अधिकार की लड़ाई
प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि खनिज अधिनियम में बदलाव झारखंड के संवैधानिक एवं आर्थिक अधिकारों पर हमला है. उन्होंने इसे जल, जंगल और जमीन के अधिकार की बड़ी लड़ाई बताया.
27 अगस्त को होगा धरना-प्रदर्शन
जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखेर भगत ने घोषणा की कि खनिज अधिनियम के प्रावधानों के विरोध में 27 अगस्त को जिला समाहरणालय परिसर में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता गांव और पंचायत स्तर तक अभियान चलाकर आम लोगों को कानून के प्रभावों से अवगत कराएंगे. संवाददाता सम्मेलन में विशाल डुंगडुंग, सीमा परवीन, मोहन दुबे, संदीप गुप्ता, मुस्ताक अहमद, मो. दानिश समेत कई कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद थे.
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