नगर परिषद उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए बिछने लगी बिसात, जोड़-तोड़ की राजनीति तेज

नगर परिषद उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए बिछने लगी बिसात, जोड़-तोड़ की राजनीति तेज

लोहरदगा़ नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद अब शहर की राजनीति में उपाध्यक्ष पद को लेकर सरगर्मी बढ़ गयी है. उपाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए संभावित दावेदारों के बीच जोड़-तोड़ और लामबंदी का दौर शुरू हो गया है. नवनिर्वाचित पार्षदों का समर्थन जुटाने के लिए बैठकों का सिलसिला तेज है. प्रमुख दावेदारों के बीच मुकाबला : सूत्रों के अनुसार, उपाध्यक्ष पद की दौड़ में दिनेश कुमार पांडेय, अब्दुल कादिर, अविनाश कौर, कुमार अभिषेक और अब्दुल वारिस के नाम सबसे आगे चल रहे हैं. इन उम्मीदवारों की ताकत का आकलन करें तो दिनेश कुमार पांडेय ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की है, जो इन्हें अनुभवी दावेदार बनाता है. अविनाश कौर ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है़ बताया जाता है कि अविनाश कौर का अनुभव और जनाधार मजबूत है. वहीं, सेना से सेवानिवृत्त अब्दुल कादिर ने पूर्व उपाध्यक्ष सह अंजुमन इस्लामिया के सदर को मात देकर बड़ी चर्चा बटोरी है. जबकि, कुमार अभिषेक पहली बार चुनाव जीतकर आयें हैं और इनके साथ सभी वर्गों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है. वहीं, उपाध्यक्ष पद के दावेदार अब्दुल वारिस भी दो बार चुनाव जीते हैं और अनुभवी व्यक्ति बताये जाते है़ं इसके अलावा कुछ और भी वार्ड पार्षद हैं जो नगर परिषद उपाध्यक्ष बनने के लिए तैयार बैठे हैं. ग्रीन सिग्नल की प्रतीक्षा में उम्मीदवार : शहर में चर्चा है कि उपाध्यक्ष पद का फैसला पूरी तरह एक प्रभावशाली व्यक्ति के ग्रीन सिग्नल पर टिका है. इसी कारण सभी दावेदार उसी ओर अपनी निष्ठा दिखाने की कोशिश में हैं. हालांकि, वार्ड पार्षदों के बीच अभी असमंजस की स्थिति है. कई पार्षद अभी खुलकर किसी के पक्ष में नहीं आये हैं और भविष्य के लाभ-हानि को देखते हुए स्थिति पर नजर गड़ाये बैठे हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि समर्थन चाहने वालों की संख्या पद के लिए जरूरी वोटों से कहीं ज्यादा है, जिससे कई लोग लाभ से वंचित रह सकते हैं. होली की खुशियों के बीच राजनीतिक रंग : एक ओर जहां होली का त्योहार शहर में खुशियां और रंग बिखेर रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में जोड़-तोड़ का अलग ही ””””रंग”””” देखने को मिल रहा है. जैसे-जैसे उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया नजदीक आ रही है, राजनीतिक समीकरण तेजी से बन और बिगड़ रहे हैं. समर्थकों ने भी अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया है. अब देखना यह है कि शहर की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठता है.

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Published by: Shailesh ambashtha

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