कैरो. प्रखंड मुख्यालय में संचालित दोनों पेट्रोल पंपों (इंडियन ऑयल और नायरा) में मंगलवार दोपहर के बाद पेट्रोल और डीजल पूरी तरह खत्म हो गया. तेल समाप्त होते ही दोनों पंपों पर नो इंट्री का बोर्ड लगा दिया गया, जिससे किसान, ट्रैक्टर, पिकअप सहित कई छोटी-बड़ी वाहनों का परिचालन ठप होने लगा है. पंप संचालकों के अनुसार, खाड़ी देशों में उत्पन्न समस्याओं के कारण पेट्रोल-डीजल की प्रचुर मात्रा उपलब्ध नहीं हो पा रही है. संकट को देखते हुए पिछले दो दिनों से नियमों के तहत सीमित मात्रा में ईंधन का वितरण किया जा रहा था. इसके तहत दोपहिया वाहनों को 100 से 200 रुपये, ट्रैक्टर व पिकअप को 1000 रुपये और बड़े मालवाहकों को अधिकतम 2000 रुपये तक का ही डीजल दिया जा रहा था. संचालकों ने कहा कि जैसे ही तेल की अगली खेप पहुंचेगी, वितरण दोबारा शुरू कर दिया जायेगा. वाहनों की कमी से खेतों में सड़ रही तरबूज व हरी सब्जियां
भंडरा. खाड़ी देशों में उत्पन्न स्थिति का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में दिखने लगा है. डीजल की किल्लत से ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह प्रभावित हो गया है, जिससे किसानों की उपज बाहरी मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही है. वर्तमान में क्षेत्र में तरबूज, खीरा, फूलगोभी, गाजर, बीट, हरी मिर्च और मकई जैसी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है, लेकिन मालवाहक गाड़ियों की कमी से खरीदार नहीं मिल रहे हैं. भंडरा के किसानों की उपज आमतौर पर बनारस, पटना, जमशेदपुर, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बंगाल की मंडियों में जाती है. ईंधन संकट के कारण व्यापारी खेतों से फसल उठाने से इनकार कर रहे हैं, जिससे तैयार तरबूज खेतों में ही खराब होने की कगार पर है. वहीं, आम की फसल भी तैयार होने वाली है, जिससे बागवानी से जुड़े किसानों की चिंता बढ़ गयी है. यदि ईंधन की यही स्थिति रही, तो आम को भी बाहर भेजना मुश्किल हो जायेगा.
