लोहरदगा. जिले में पदस्थापित अधिकतर विभागों के अधिकारी, कर्मचारी जिला मुख्यालय में नहीं रहते हैं. ये अधिकारी रांची, लोहरदगा यात्री ट्रेन से प्रतिदिन आना-जाना करते हैं. ट्रेन रांची से लोहरदगा 11.30 बजे पहुंचती है. अधिकारियों का कार्यालय पहुंचने का समय 12 बजे होता है. और फिर शाम 4 बजे वाली ट्रेन से लौटने के लिए उन्हें साढ़े तीन बजे ही ऑफिस से निकलना पड़ता है. सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतनी देर में अधिकारी -कर्मचारी क्या काम करते होंगे. अधिकारियों के इंतजार में ग्रामीण घंटों खड़े रहते हैं, लेकिन उनका काम नहीं हो पाता है. ऐसे ही अधिकारियों के कारण जिले में विकास बाधित हो रहा है. कई बार इन लोगों को जिला मुख्यालय रहने का निर्देश भी दिया गया लेकिन इनके रवैये में कोई सुधार नहीं आया. जब जिले के आला अधिकारियों द्वारा इनके उपर कड़ाई की जाती है तब ये लोग अपने सरकारी वाहन से रांची आना जाना शुरु कर देते हैं जबकि लोहरदगा में अधिकारियों के लिए आवास बेहतर सुविधा उपलब्ध है लेकिन अधिकारी शायद यहां रहना अपने शान के खिलाफ समझते हंै. जिला स्तरीय अधिकारियों के इस रवैये के कारण प्रखंडों में पदस्थापित अधिकारी, कर्मचारी भी प्रखंड मुख्यालयों में नहीं रहते हैं. जिले का विकास बाधित होने के पीछे एक बड़ा कारण यहां अधिकारियों का जिला एवं प्रखंड मुख्यालय में नहीं रहना भी है.
जिला व प्रखंड मुख्यालयों में नहीं रहते हैं अधिकारी-कर्मचारी
लोहरदगा. जिले में पदस्थापित अधिकतर विभागों के अधिकारी, कर्मचारी जिला मुख्यालय में नहीं रहते हैं. ये अधिकारी रांची, लोहरदगा यात्री ट्रेन से प्रतिदिन आना-जाना करते हैं. ट्रेन रांची से लोहरदगा 11.30 बजे पहुंचती है. अधिकारियों का कार्यालय पहुंचने का समय 12 बजे होता है. और फिर शाम 4 बजे वाली ट्रेन से लौटने के लिए […]
