लोहरदगा : छोटानागपुरिया तेली उत्थान समाज के जिलाध्यक्ष कृष्णा प्रसाद साहू की अध्यक्षता में समाहरणालय के समक्ष एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया. धरना में तेली जाति को अनुसूचित जन जाति में शामिल करने के लिए उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री रघुवर दास के नाम मांग पत्र सौंपने का निर्णय लिया गया. मौके पर कहा गया कि हम छोटानागपुरिया तेली समाज के नाम से जाने जाते है.
दक्षिणी छोटानागपुर हमारे पूर्वजों की भूमि है. यह हमारी जन्मभूमि, कर्मभूमि, पुण्यभूमि व मुक्ति भूमि है. हमारा वर्ष 236-1240 रजिया सुल्तान के समय से निवास करने का प्रमाण है. हमारे कुछ लोग पहान, पुजार, महतो व भुइहर थे. हमारी भाषा नागपुरी है. इतिहास व संस्कृति कू दृष्टिकोण से हम आदिवासी है. आज से 70-80 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र के उरांव, मुंडा व खड़िया जाति को कोल्ह कहा जाता था. उस समय तेली जाति को कोल्ह तेली कहा जाता था. आज भी सुदूर देहात क्षेत्र में कोल्ह व कोल्ह तेली ही कहा जाता है.
जबकि दोनों का संस्कार, खान-पान, रहन-सहन, मरन-जन्म, शादी-विवाह व पर्व-त्योहार एक है. लेकिन एक साजिश के तहत कोल्ह, उरांव, खड़िया व मुंडा को अनुसूचित जनजाति व कोल्ह तेली को पिछड़ी जाति की सूची में शामिल किया गया है. मौके पर समाज के लोगों ने कहा कि हम छोटानागपुरिया तेली समाज झारखंड के सबसे पुराने वाशिंदे है.
चूंकि जंगल भयानक थे व आबादी कम थी. इसलिए अपनी सुरक्षा को बढ़ाने के इरादे से हर आनेवाले जाति को दोना व कोना देकर बसाया तथा उन्हें जमीन जगह व गांव बसाने में मदद की परंपरा से सहयोग किया. तेली उत्थान समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाये. मौके पर डॉ टी साहू, संजय कुमार साहू, महेश्वर साहू, बजरंग साहू, मुकेश प्रसाद साहू, प्रकाश कुमार साहू, अशोक साहू, रवि साहू, बलराम साहू, भरत साहू, मुनेश्वर साहू, रामकेश्वर साहू, कालीचरण साहू, दिनेश साहू, सुदर्शन साहू, अनिता साहू, उमा देवी, सुनिता साहू, शीला साहू, रोशंती देवी, अनिता देवी, सविता साहू, सुनील साहू, राजू साहू, बबीता देवी, दिलीप साहू, नंदलाल किशोर साहू, पंकज साहू समेत अन्य मौजूद थे.
