आदिवासी सभ्यता व संस्कृति ही हमारी मूल पहचान : निशा भगत

आदिवासी सभ्यता व संस्कृति ही हमारी मूल पहचान : निशा भगत

चंदवा़ प्रखंड की जमीरा पंचायत अंतर्गत महुआमिलान स्थित हजारीबर मैदान में शनिवार को राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक कलश यात्रा के साथ हुई, जो गांव भ्रमण करते हुए दाड़ी तट पहुंची. वहां विधि-विधान से पूजन के बाद पवित्र जल भरकर कलश स्थापित किया गया. सामूहिक प्रार्थना में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. पारंपरिक रीति-रिवाज से हुआ अतिथियों का स्वागत : कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि युवा आदिवासी नेत्री निशा भगत व अन्य प्रबुद्धजनों ने दीप प्रज्वलित कर किया. लातेहार, लोहरदगा और रांची जिलों से आये अतिथियों का स्वागत मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य के साथ किया गया. समिति द्वारा सभी गणमान्य लोगों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया. पाहन अर्जुन पाहन, मुनेश्वर पाहन, कन्द्रा पाहन एवं मेनका पुजेर के सानिध्य में विशेष पूजा संपन्न हुई. कुरीतियों को दूर कर शिक्षा पर दें जोर : सभा को संबोधित करते हुए निशा भगत ने कहा कि आदिवासी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखना अनिवार्य है, क्योंकि यही हमारी असली पहचान है. उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने, शिक्षा को बढ़ावा देने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता रिमल उरांव और संचालन बिमल उरांव ने किया. इनका रहा योगदान : आयोजन को सफल बनाने में कर्मा उरांव, जयमंगल उरांव, राजू, लल्लू, बले, मनोज, अनुज, कृष्णा, अशोक, राजमणि, प्रतिमा, सोमती, जीतू, कमलू, श्वेता, ललिता सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही.

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By SHAILESH AMBASHTHA

SHAILESH AMBASHTHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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