चंदवा़ बरकाकाना-बरवाडीह रेलखंड के महुआमिलान और निंद्रा रेलवे स्टेशन के बीच पुतरी टोला (पोल संख्या 172/30) के समीप सोमवार की देर रात एक हाथी के बच्चे की मौत हो गयी. सोमवार की शाम हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था, इसी दौरान एक मालगाड़ी की चपेट में आने से बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया था. घटना के बाद अन्य हाथियों के वहां जमे रहने के कारण समय पर घायल बच्चे को चिकित्सीय सुविधा नहीं मिल सकी. मंगलवार की सुबह डीएफओ प्रवेश अग्रवाल और रेंजर नंदकुमार महतो की उपस्थिति में पशु चिकित्सक डॉ सरोज केरकेट्टा ने शव का अंत्यपरीक्षण किया, इसके बाद वनकर्मियों की देखरेख में उसे दफना दिया गया. दिखा ममत्व : पूरी रात घायल बच्चे को सुंड़ से सहलाते रहे माता-पिता : हादसे के बाद जंगल में पशुओं के ममत्व की एक भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आयी. घायल बच्चे के साथ दो हाथी (संभवतः माता-पिता) पूरी रात रेलवे ट्रैक पर डटे रहे. वे बार-बार अपनी सुंड़ से घायल बच्चे को उठाने का प्रयास कर रहे थे और उसे ट्रैक के किनारे ले गये. हाथियों की चिंघाड़ से आसपास के ग्रामीण दहशत में थे. हाथियों के पहरे के कारण वन कर्मी या चिकित्सक पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके. सुबह करीब 5:30 बजे जब हाथी वहां से जंगल की ओर गये, तब जाकर विभाग ने आगे की कार्रवाई शुरू की. मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने मृत हाथी को पुष्पांजलि अर्पित कर पूजा-अर्चना भी की. रेल यातायात बेपटरी, वंदे भारत समेत कई ट्रेनें जहां-तहां खड़ी रहीं : इस दुर्घटना के कारण रेलखंड पर परिचालन पूरी तरह चरमरा गया. डाउन लाइन पर करीब 12 घंटे और अप लाइन पर सात घंटे तक ट्रेनों के पहिये थमे रहे. वंदे भारत एक्सप्रेस शाम से टोरी जंक्शन पर खड़ी रही, जिसे बाद में वापस बरवाडीह भेज दिया गया. पलामू एक्सप्रेस मैक्लुस्कीगंज में घंटों खड़ी रही. गरीब रथ राय स्टेशन पर रुकी रही और रात 2:05 बजे टोरी पहुंची. हावड़ा-भोपाल एक्सप्रेस का मार्ग बदलकर बरकाकाना होकर निकाला गया. ट्रेनों के जहां-तहां खड़े होने से यात्री पूरी रात हलकान रहे. बरकाकाना-डेहरी ऑन सोन पैसेंजर खबर लिखे जाने तक टोरी में ही खड़ी थी.
ट्रेन की चपेट में आने से घायल हाथी के बच्चे ने तोड़ा दम
ट्रेन की चपेट में आने से घायल हाथी के बच्चे ने तोड़ा दम
