बेतला़ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आगामी माॅनसून प्रतिबंध के खौफ ने बरवाडीह और बेतला इलाके में बालू के कारोबार को तेज कर दिया है. प्रतिबंध लागू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा स्टॉक जमा करने की होड़ ठेकेदारों व बालू माफियाओं में मची है. बालू का उठाव करनेवाले लोगों ने औरंगा और कोयल नदी के अस्तित्व को दांव पर लगा दिया है. रोक लगने के डर का फायदा उठाकर इन दिनों बालू घाटों पर लूट मची है. बेतला नेशनल पार्क के करीब होने के बावजूद इस संवेदनशील इलाके में पर्यावरण नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है. सड़कों पर ट्रैक्टरों का कब्जा, हर तरफ लगे हैं बालू के ढेर : इलाके की कोई भी ऐसी सड़क नहीं है, जहां बालू लदे वाहन नहीं दिख रहे हों. अहले सुबह से लेकर देर रात तक ट्रैक्टरों की तेज आवाजाही से पूरा इलाका गूंज रहा है. करीब हर चौक-चौराहे और खाली जमीनों पर बालू के अवैध ढेर देखे जा सकते हैं. इसके अलावा औरंगा नदी के दूसरी ओर पलामू के सतबरवा प्रखंड के इलाकों में भी भारी मात्रा में बालू का उठाव किया जा रहा है. ऊंचे दामों पर बेचने के लिए माफिया कर रहे गुप्त भंडारण : इस अवैध खेल में कई वर्ग शामिल हैं. आम लोग आवासीय निर्माण के लिए प्रतिबंध से पहले बालू जमा कर रहे हैं. सरकारी योजनाओं, सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए भी भारी मात्रा में बालू डंप किया जा रहा है. वहीं, बालू माफिया आगामी दिनों में इसे ऊंचे दामों पर बेचने के लिए गुप्त भंडारण कर रहे हैं. नदियों का अस्तित्व खतरे में है, लेकिन प्रशासन मौन है.
औरंगा और कोयल नदी से तेजी से हो रहा है बालू का उठाव
औरंगा और कोयल नदी से तेजी से हो रहा है बालू का उठाव
