जंगलों पर निर्भरता होगी कम, गांव होंगे आत्मनिर्भर: पीटीआर के 22 गांवों के 2025 परिवारों को सोलर चूल्हे व कृषि यंत्रों की सौगात

पलामू टाइगर रिजर्व ने 22 गांवों के 2025 परिवारों को सोलर चूल्हे और कृषि यंत्र बांटे, ताकि जंगलों पर ग्रामीणों की निर्भरता को कम किया जा सके।

संतोष कुमार की रिपोर्ट बेतला नेशनल पार्क. पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रबंधन द्वारा वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया गया है. इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य जंगलों पर स्थानीय आबादी की पारंपरिक निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना और वन विभाग व ग्रामीणों के बीच एक मजबूत सहयोगात्मक समन्वय स्थापित करना है.

22 गांवों को किया गया है चिन्हित

इस दूरगामी रणनीति के तहत पीटीआर के दक्षिणी प्रमंडल अंतर्गत आने वाले गारू पूर्वी और गारू पश्चिमी रेंज के कुल 22 गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां के निवासियों के बीच दैनिक उपयोग और खेती-किसानी से जुड़ी आवश्यक सामग्रियों का बड़े पैमाने पर वितरण किया गया.इस भव्य वितरण कार्यक्रम का आयोजन गारू में किया गया, जिसमें मनिका विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक रामचंद्र सिंह, पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एस आर नटेश, डिप्टी डायरेक्टर कुमार आशीष और स्थानीय रेंजर उमेश कुमार दुबे ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया.

पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों का वितरण

वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रनिधि के हाथों क्षेत्र के कुल 2025 लाभार्थी परिवारों के बीच उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों का वितरण किया गया.इन उपकरणों में सोलर चूल्हा, रात के उजाले के लिए सोलर लालटेन, कृषि कार्यों को गति देने के लिए कुदाल और अन्य आधुनिक कृषि यंत्र मुख्य रूप से शामिल हैं. वन विभाग का मानना है कि इन आधुनिक संसाधनों के मिल जाने से ग्रामीणों को ईंधन की लकड़ी या अन्य छोटी-मोटी जरूरतों के लिए बार-बार जंगल के भीतर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा.

ग्रामीणों के सहयोग के बिना जंगलों को बचाना असंभव

सामग्री वितरण के पश्चात उपस्थित जनसमुदाय और वन कर्मियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मनिका विधायक रामचंद्र सिंह ने इस पहल की सराहना की. उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि पलामू टाइगर रिजर्व के घने जंगलों और अनमोल वन्यजीवों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका सबसे अग्रणी और बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी आपस में एक-दूसरे के प्रति विश्वास और सहयोगात्मक संबंध नहीं रखेंगे, तब तक न तो जंगलों को कटने से बचाया जा सकता है और न ही बेजुबान जानवरों की रक्षा की जा सकती है. विधायक ने इस बात पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की कि पीटीआर प्रबंधन केवल कड़े नियम लागू करने के बजाय स्थानीय ग्रामीणों को संरक्षण कार्यों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का यह सराहनीय व मानवीय प्रयास कर रहा है.

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पीटीआर को उसका पुराना गौरव लौटाना मुख्य लक्ष्य

कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर एस आर नटेश ने वन विभाग की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि वन विभाग स्थानीय वनों के आसपास रहने वाले लोगों को हर संभव लाभ पहुंचाने और उनके कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. फील्ड डायरेक्टर ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व का अपना एक समृद्ध इतिहास और गौरव रहा है. प्रबंधन अब अपने उसी पुराने गौरव को फिर से वापस लौटाने के संकल्प के साथ काम कर रहा है, और इस बड़े उद्देश्य को केवल और केवल स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से ही प्राप्त किया जा सकता है. विभाग भविष्य में भी ऐसी लोक-कल्याणकारी योजनाएं जारी रखेगा.

लोगों के सहयोग के बिना संरक्षण की बातें बेमानी

डिप्टी डायरेक्टर कुमार आशीष ने अपने विचार साझा करते हुए जंगल, जमीन और पर्यावरण के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि धरातल पर जंगल और जानवरों को बचाने की मुहिम में स्थानीय लोगों की भूमिका एक सुरक्षा कवच की तरह है. जब तक हमें ग्रामीणों का वास्तविक और दिल से सहयोग नहीं मिलेगा, तब तक जंगल और जानवरों की आबादी बढ़ाने की बात करना पूरी तरह से बेमानी और बेअसर साबित होगा. ग्रामीणों की खुशहाली ही इस टाइगर रिजर्व की असली ताकत है और उन्हें संकट में डालकर पर्यावरण की रक्षा नहीं की जा सकती

ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना मुख्य उद्देश्य

कार्यक्रम के अंतिम चरण में गारू रेंज के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने इस पूरे वृहद आयोजन के मुख्य औचित्य, उद्देश्यों और इसकी रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वन विभाग उनके अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए हमेशा तत्पर है. उन्होंने बताया कि स्थानीय समुदाय के सक्रिय और सकारात्मक सहयोग के बिना वन्यजीव संरक्षण की कोई भी व्यावहारिक कल्पना नहीं की जा सकती.

आधुनिक और वैकल्पिक सुविधाएं प्रदान करना

इस वितरण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को आधुनिक और वैकल्पिक सुविधाएं प्रदान करना है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और आजीविका के लिए वनों पर उनकी निर्भरता न्यूनतम स्तर पर आ जाये. कार्यक्रम के अंत में वन विभाग द्वारा सभी आगंतुकों और ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया गया.


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लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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