लातेहार में गूंजा पेसा कानून का उद्घोष, ग्राम सभाएं हुईं शक्ति संपन्न
लातेहार में गूंजा पेसा कानून का उद्घोष, ग्राम सभाएं हुईं शक्ति संपन्न
लातेहार ़ झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने के साथ ही ग्राम सभाओं को संवैधानिक और कानूनी रूप से व्यापक अधिकार प्राप्त हो गये हैं. अब ग्राम सभाएं विधायी, कार्यपालिक और न्यायिक शक्तियों से पूरी तरह संपन्न हैं. इसी कड़ी में जिले के गारू प्रखंड स्थित दलदलिया में पेसा नियमावली विजय दिवस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया. वन क्षेत्र में ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य : कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जेम्स हेरेंज ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व सहित पूरे वन क्षेत्र में किसी भी परियोजना के लिए अब ग्राम सभा की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस क्षेत्र पर वर्षों से वन विभाग अपना एकछत्र अधिकार समझता था, वहां अब ग्राम सभा सर्वोच्च होगी. कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक आदिवासी लोकगीतों और नृत्य के साथ हुआ. इसके पश्चात केलसा नदी के तट पर पाहन राजेश्वर सिंह ने पारंपरिक पूजा-पाठ कर जल, जंगल और जमीन को अवैध दोहन से बचाने की प्रार्थना की. श्रमदान से जल संरक्षण की अनूठी पहल : ग्राम प्रधान राजू उरांव और पाहन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जल संरक्षण के उद्देश्य से पत्थरों की बंधाई कर एक प्रतीकात्मक शुरुआत की. सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव का प्रत्येक परिवार हर माह श्रमदान करेगा, ताकि वर्षा जल को रोककर जलस्तर सुधारा जा सके. ग्राम स्वशासन अभियान के मिथिलेश कुमार ने पेसा के तहत ग्राम सभाओं द्वारा अपनायी जाने वाली प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी. वन विभाग पर प्रताड़ना का आरोप : करवाई ग्राम सभा की सदस्य शांति देवी ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीते दो वर्षों से हिरण प्रजनन केंद्र, ग्रास प्लॉट और सड़क निर्माण के बहाने आदिवासियों को उनके पारंपरिक वन अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. वहीं, भारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता संघ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद मूर्ति ने कहा कि ग्राम सभाओं को प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार मिलना वैश्विक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा. इस मौके पर कन्हाई सिंह, अमिंता उरांव, संध्या देवी, निर्मल बृजिया, कमलेश सिंह, विमल तिग्गा, विमल सिंह, सोमवती देवी समेत काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
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