मंडल डैम डूब क्षेत्र में बाढ़ से तबाही: भजना गांव में घर जलमग्न, पीटीआर ने लगाया राहत शिविर

मंडल डैम के डूब क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों के लिए पलामू टाइगर रिजर्व की टीम राहत बनकर सामने आई है। जानिए कैसे वन विभाग कर रहा है मदद।

बेतला से संतोष कुमार की रिपोर्ट

लातेहार. मंडल डैम के डूब क्षेत्र में बाढ़ से मची तबाही के बीच पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रबंधन ने राहत अभियान तेज कर दिया है. उप निदेशक प्रजेश कांत जेना के निर्देश पर मदगड़ी स्थित कुटकू वन प्रक्षेत्र कार्यालय में आपात राहत शिविर लगाया गया. वन क्षेत्र पदाधिकारी अजय टोप्पो के नेतृत्व में कुटकू, भजना और खुरा गांव के बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचायी गयी.

भजना में सबसे ज्यादा तबाही

बाढ़ का सबसे गंभीर असर भजना गांव में देखने को मिला है. यहां कई ग्रामीणों के घर पूरी तरह जलमग्न हो गये हैं और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गये हैं. पीटीआर प्रबंधन ने प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. उनके रहने और भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है.

राहत शिविर में जरूरी सामान का वितरण

राहत शिविर में प्रभावित परिवारों को प्राथमिक उपचार किट, सूखा राशन, तिरपाल और मच्छरदानी उपलब्ध करायी गयी. वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया.

अधिकारियों ने कहा कि जब तक बाढ़ का पानी कम नहीं होता और हालात सामान्य नहीं हो जाते, राहत और सहायता का काम जारी रहेगा.

पुनर्वास की प्रक्रिया जारी

मंडल डैम यानी उत्तर कोयल जलाशय परियोजना के जलमग्न क्षेत्र में कुटकू, भजना, चेमो, सनेया, खुरा, खैरा और मेराल सहित सात गांव आते हैं. यह परियोजना 1970 के दशक से लंबित है और पलामू टाइगर रिजर्व के घने वन क्षेत्र में स्थित है.

पुनर्वास स्थलों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मंजूरी

सरकारी स्तर पर इन गांवों के करीब 780 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत गढ़वा जिले के रंका और रमकंडा प्रखंडों में प्रति परिवार एक एकड़ रैयती जमीन और 15 लाख रुपये का वित्तीय मुआवजा देने की प्रक्रिया है. हाल ही में राज्य कैबिनेट ने पुनर्वास स्थलों को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मंजूरी भी दी है.

पुश्तैनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं कई परिवार

वहीं, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण कई प्रभावित परिवार अब भी अपनी पुश्तैनी जमीन और गांव छोड़ना नहीं चाहते हैं. ग्रामीण अपनी पैतृक पहचान और शहीद नीलांबर-पीतांबर की जन्मस्थली को बचाने की मांग को लेकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और आंदोलन भी कर रहे हैं.

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By Deepak

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