Latehar News: विरोध के बीच नॉर्थ धाधू कोल परियोजना की जनसुनवाई अधूरी, अधिकारियों को पंडाल में जाने से रोका

झारखंड के बालूमाथ में एनएलसी इंडिया लिमिटेड की पर्यावरणीय जनसुनवाई बाहरी लोगों के हंगामे के कारण अधूरी रही। प्रशासन ने कार्रवाई को स्थगित किया।

बालूमाथ,लातेहार: झारखंड प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से एनएलसी इंडिया लिमिटेड को आवंटित नॉर्थ धाधू (वेस्ट पार्ट) कोल परियोजना के लिए गुरुवार को आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई अधूरी रह गयी. विरोध के कारण निर्धारित स्थल पर जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी. काफी प्रयास के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं होने पर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी प्रभात कुमार ने कार्रवाई स्थगित करने की घोषणा की. इससे पहले परियोजना के विरोध में पहुंचे लोगों ने कार्यक्रम स्थल पर हंगामा किया और पदाधिकारियों को पंडाल में प्रवेश करने से रोक दिया.

छह गांवों की 754.54 हेक्टेयर भूमि का होना है उपयोग

एनएलसी इंडिया लिमिटेड के सीजीएम अभय भगत ने बताया कि नॉर्थ धाधू (वेस्ट पार्ट) कोल परियोजना के तहत अगले 42 वर्षों में 4.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है. परियोजना के लिए बालूमाथ प्रखंड के हेमपुर, भैंसादोन, सेमरसोत, धाधू, चित्तरपुर और नवाडीह गांव की कुल 754.54 हेक्टेयर भूमि का उपयोग खनन कार्य के लिए किया जाना है. कंपनी के अनुसार परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब तीन हजार लोगों को रोजगार मिलेगा. कंपनी ने अपने सामाजिक दायित्वों के तहत कार्य करने की बात भी कही.

विरोध के कारण पदाधिकारियों को नहीं मिल सका प्रवेश

जनसुनवाई के लिए झारखंड प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और जिला प्रशासन की ओर से पदाधिकारी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे. लेकिन विरोध कर रहे लोगों की भीड़ के कारण उन्हें पंडाल में प्रवेश करने में परेशानी हुई. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी प्रभात कुमार को भी पंडाल में जाने से रोके जाने की बात सामने आयी. प्रखंड परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार और पंडाल के दोनों द्वार पर भी लोगों की भीड़ जमा रही.

विरोध के दौरान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे पत्रकारों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ भी दुर्व्यवहार किये जाने का आरोप लगाया गया. स्थिति सामान्य नहीं होने के कारण जनसुनवाई की निर्धारित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.

परियोजना प्रभावित गांवों के लोगों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल

कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में परियोजना से प्रभावित गांवों के अलावा आसपास के अन्य गांवों के लोग भी शामिल थे. कंपनी प्रबंधन की ओर से परियोजना से होने वाले रोजगार और अन्य लाभों की जानकारी देने का प्रयास किया गया, लेकिन विरोध कर रहे लोग अपनी मांगों पर कायम रहे.

बताते चलें कि नॉर्थ धाधू परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में विरोध जारी था. ग्रामीणों की ओर से पहले ही जनसुनवाई रद्द करने की मांग की गयी थी.

पर्यावरणीय जनसुनवाई का आयोजन परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों पर स्थानीय लोगों की आपत्तियां और सुझाव दर्ज करने की प्रक्रिया का हिस्सा है. केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के PARIVESH पोर्टल पर भी परियोजनाओं से संबंधित पर्यावरणीय स्वीकृति और जनसुनवाई से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराये जाते हैं.


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By Sumit kumar

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