बेतला में 10 वर्षों से हाथी सफारी बंद, शो-पीस बने चार-चार पालतू हाथी

बेतला में 10 वर्षों से हाथी सफारी बंद, ”शो-पीस” बने चार-चार पालतू हाथी

बेतला़ भारत की जैव-विविधता और खूबसूरती की अद्भुत मिसाल बेतला नेशनल पार्क में पिछले 10 वर्षों से हाथी सफारी बंद है. देश के अन्य हिस्सों में यह रोमांच जारी है, लेकिन बेतला आने वाले पर्यटकों के लिए यह आज भी एक अनबूझ पहेली बनी हुई है. वर्तमान में यहां जूही, सीता, मुर्गेश और राखी नामक चार पालतू हाथी हैं, जो केवल ””शो-पीस”” बनकर रह गये हैं. इनके खान-पान, देखरेख और हाथीशाला पर वन विभाग हर साल लाखों रुपये खर्च कर रहा है, मगर सैलानियों को इनकी सवारी का सुख नहीं मिल रहा है. वन्यजीवों को करीब से देखने का नहीं मिलता मौका : हाथी सफारी का अनुभव वाहन सफारी से बिल्कुल अलग होता है. हाथी पर्यटकों को जंगल के उन दुर्गम और अंदरूनी हिस्सों तक ले जाते हैं, जहां गाड़ियां नहीं पहुंच सकतीं. इससे वन्यजीवों को काफी करीब से निहारने का मौका मिलता था. आजकल हजारों सैलानी बेतला पहुंच रहे हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि हाथी की सवारी बंद है, तो वे मायूस हो जाते हैं. पर्यटक अब सुबह-शाम हाथियों को केवल हाथीशाला से जंगल आते-जाते देख पाते हैं और उनके साथ सेल्फी लेकर ही संतुष्ट होना पड़ता है. फिल्मी सितारों और दिग्गजों की रही है पसंद : एक समय था जब बेतला में हाथी की सवारी के लिए सैलानियों के बीच होड़ लगी रहती थी और अग्रिम बुकिंग करानी पड़ती थी. अभिनेता दिलीप कुमार, सायरा बानो, शत्रुघ्न सिन्हा, राज बब्बर और नाना पाटेकर जैसी फिल्मी हस्तियों के अलावा कई प्रशासनिक व न्यायिक पदाधिकारियों ने बेतला की इस सफारी का लुत्फ उठाया था. बच्चों और परिवारों के लिए यह अनुभव बेहद रोमांचकारी होता था. 1982 से शुरू हुआ था सफर, काल भैरव की मौत से लगा झटका : हाथी सफारी की शुरुआत 1982 में हुई थी. 1980 में गुमला से ””रजनीगंधा”” को लाया गया, इसके बाद जूही, चंपा व अनारकली बेतला का हिस्सा बनीं. समय के साथ रजनीगंधा, चंपा व अनारकली की मौत हो गयी. मांग बढ़ते देख विभाग ने कर्नाटक से तीन हाथी काल भैरव, सीता और मुर्गेश को मंगाया था. दुर्भाग्यवश, काल भैरव को पलामू किला के पास एक जंगली हाथी ने मार डाला. अब केवल चार हाथी शेष हैं. इनमें राखी छोटी है और जूही काफी बूढ़ी हो चुकी है. एशियाई महिला हॉकी की शुभंकर रही है ””जूही”” : बेतला की पालतू हथिनी जूही की ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही है. दो वर्ष पहले रांची में आयोजित महिला हॉकी एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में जूही को ही ””मैस्कॉट”” (शुभंकर) बनाया गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं इसके शुभंकर का अनावरण किया था. आज वही जूही और उसके साथी हाथी सैलानियों की सवारी का इंतजार कर रहे हैं.

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Published by: Shailesh ambashtha

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