विस्थापित होनेवाले रैयत व ग्रामीणों की बैठक में पेशा कानून की बारीकियों पर चर्चा
विस्थापित होनेवाले रैयत व ग्रामीणों की बैठक में पेशा कानून की बारीकियों पर चर्चा
चंदवा़ प्रखंड अंतर्गत बनहरदी पंचायत सचिवालय परिसर में रविवार को बनहरदी कोल परियोजना से विस्थापित होनेवाले रैयतों और ग्रामीणों की बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता ग्राम प्रधान रोबेन उरांव ने की. बैठक में राज्य सरकार द्वारा हाल ही लागू किये गये पेशा कानून के नियमों व बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की गयी. ग्रामीणों ने कहा कि नये नियमों के तहत ग्रामसभा को अधिकार मिला है. इससे गांव सशक्त होंगे. ग्रामसभा की भूमिका व महत्व भी बढ़ेगा. बैठक के दौरान ग्रामीण काफी खुश दिखे. इस दौरान रैयतों ने यहां प्रस्तावित कोल परियोजना को लेकर भी विचार-विमर्श किया. स्पष्ट कहा कि परियोजना से विस्थापन के पूर्व वे अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रख रहे हैं. प्रमुख समस्या जमीन संबंधी त्रुटि है. इसे लेकर अंचल कार्यालय से लेकर जिला कार्यालय तक कई बार आवेदन दिया जा चुका है, बावजूद इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं हो रही है. इससे रैयतों में भारी आक्रोश है. परियोजना से प्रभावित होनेवाले बारी गांव के रैयत भी इस मुद्दे पर एकजुट दिखे. ग्रामीणों ने उम्मीद जतायी कि पेशा कानून के तहत मिले ग्रामसभा के अधिकारों से अब उनकी समस्याओं का समाधान होगा. बैठक में शिक्षक बेलाल अहमद, रमेश उरांव, हाजी हाशिम अहमद, जीते उरांव, रामसहाय उरांव, जितेंद्र उरांव, नेजाम मियां, शंकर सिंह, ताहिर अंसारी, तेतर मोची, प्रदीप भुइयां, धनलाल उरांव, सुरेश उरांव, इदरीस अंसारी, प्रभु यादव, शिबू सरदार, शमशेर अंसारी, परमेश्वर लोहरा, सहदेव उरांव, गोपाल ठाकुर, कंदरू मोची समेत काफी संख्या में महिला-पुरुष मौजूद थे.
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