चंदवा़ आजसू पार्टी के सुप्रीमो सह पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने कहा कि अलग राज्य की मांग सबसे पहले गांवों से ही उठी थी, लेकिन आज गांव हर मुद्दे पर पिछड़ गये हैं. युवा, बेरोजगारी और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दे आज भी जस के तस हैं, जिनपर कभी कोई राजनीतिक बहस नहीं होती. श्री महतो रविवार को लादू बाबू बैंक्विट हॉल परिसर में आयोजित पलामू प्रमंडल स्तरीय सामाजिक मंथन सह युवा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दिनों हेमंत है तो हिम्मत है का नारा चल रहा है, लेकिन सरकार बताये कि पिछले पांच साल में वह किसकी आवाज बनी? आज गांव के लोग और किसान परेशान हैं. यह नारा दरअसल बीडीओ, सीओ, दारोगा और दफ्तरों के सरकारी बाबुओं के लिए है, क्योंकि उन्हें पता है कि उनकी हर गलती को हेमंत बचा लेंगे. राज्य के उच्च अधिकारी भी अब लोक सेवा की सीमा से बाहर निकल चुके हैं. जिन आंदोलनकारियों के बल पर अलग झारखंड बना, आज उन्हें ही अपने हक के लिए आवेदन देना पड़ रहा है. तीन साल सामाजिक राजनीति को दें युवा : सुदेश महतो ने कहा कि वर्तमान दौर चुनौतीपूर्ण है, इसलिए मंथन जरूरी है. कुछ दल सिर्फ चुनाव में जोड़-तोड़ की राजनीति करते हैं, जबकि आजसू विचारों की पार्टी है. उन्होंने युवाओं से संगठन से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि यदि वे अपने तीन साल सामाजिक राजनीति को देंगे, तो आने वाला 30 साल सुरक्षित हो जायेगा. संसाधनों की कमी नहीं, कुशल नेतृत्व का अभाव : देवशरण : इससे पूर्व, केंद्रीय प्रवक्ता देवशरण भगत ने कहा कि झारखंड आंदोलन से उपजी पार्टी जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रही है. राज्य में संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि कुशल नेतृत्व का अभाव है. आजसू नेता संजीव कुमार ने लातेहार में मिनी सर्वे कराने तथा विस्थापन, पुनर्वास व मुआवजे की स्थानीय समस्याओं को पटल पर रखा. मौके पर पलामू जिलाध्यक्ष दिलीप चौधरी, गढ़वा के दीपक शर्मा, लातेहार के अमित पांडेय, प्रखंड अध्यक्ष राजा दुबे, पंकज जायसवाल सहित काफी संख्या में आजसू कार्यकर्ता उपस्थित थे.
आजसू विचारों की पार्टी, गांव के मुद्दों पर नहीं होती कोई राजनीतिक बहस : सुदेश महतो
आजसू विचारों की पार्टी, गांव के मुद्दों पर नहीं होती कोई राजनीतिक बहस : सुदेश महतो
