बारियातू : प्रखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है. शिबला पंचायत के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बाराखाड़ में कई दिनों से शिक्षक नहीं आ रहे हैं. प्रतिदिन शिक्षक का इंतजार कर विद्यार्थी घर लौट जा रहे हैं. इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. यही नहीं अधिकतर समय विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों को महीने में एक-दो दिन ही मध्याह्न भोजन मिलता है.
इस विद्यालय में 86 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल के सचिव सह पारा शिक्षक राम पति उरांव हैं. वह जब चाहते हैं, स्कूल आते हैं. नहीं तो विद्यालय बंद रहता है.
बच्चे इस आस में विद्यालय पहुंचते हैं कि शायद विद्यालय खुले. वे पढ़ाई कर सकें और मध्याह्न भोजन भी मिले. बच्चे आये दिन शिक्षक का इंतजार कर लौट जाते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले विद्यालय में दो शिक्षक थे, जिसमें से एक पारा शिक्षक की नियुक्ति नियमित होने के बाद उनका पदस्थापन कहीं और हो गया. बच्चों का कहना था कि मध्याह्न भोजन महीने में एक या दो बार मिलता है. आज तक उन्हें अंडा नहीं दिया गया.
अब तक बीइइओ ने नहीं की कार्रवाई : ग्रामीणों ने कई बार इस संबंध में बीइइओ से शिकायत की. दस दिन पहले भी बीइइओ नरेश गुप्ता से ग्रामीणों ने विद्यालय बंद रहने की शिकायत की थी. लेकिन आज तक न तो शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई हुई, न ही लगातार विद्यालय खुलवाने का प्रयास किया गया. इस संबंध में स्कूल के पारा शिक्षक राम पति उरांव से उनके मोबाइल पर बात करने की कोशिश की गयी, लेकिन मोबाइल बंद था. ग्रामीणों ने उपायुक्त से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है.
शिक्षक को दी गयी थी चेतावनी
बीइइओ नरेश गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर शिक्षक राम पति उरांव को चेतावनी दी गयी थी. लेकिन उसके बाद भी वह विद्यालय नहीं जा रहे हैं तो कार्रवाई की जायेगी. मध्याह्न भोजन विद्यालय आने वाले बच्चों को रोजाना दिया जाना है. यदि मध्याह्न भोजन नहीं दिया जा रहा है, तो वह जल्द ही ग्रामीणों से मिल कर कार्रवाई करेंगे.
