चालू हो, तो हजारों को मिलेगी नौकरी

टैनिन एवं चर्म शोधनालय भी बेकार सुनील कुमार लातेहार : सोने का अंडा देने वाली मुर्गी कहा जाने वाला सॉल्वेंट प्लांट विगत तीन दशक से बंद पड़ा है. इस प्लांट के बंद होने से करीब पांच हजार लोग बेरोजगार हो गये थे. सॉल्वेंट प्लांट की उत्पादों की मांग देश के अलावा विदेशों में भी थी. […]

टैनिन एवं चर्म शोधनालय भी बेकार
सुनील कुमार
लातेहार : सोने का अंडा देने वाली मुर्गी कहा जाने वाला सॉल्वेंट प्लांट विगत तीन दशक से बंद पड़ा है. इस प्लांट के बंद होने से करीब पांच हजार लोग बेरोजगार हो गये थे. सॉल्वेंट प्लांट की उत्पादों की मांग देश के अलावा विदेशों में भी थी.
इसके बाय प्रोडक्ट (खल्ली) की उपयोगिता इतनी थी कि कई देशों से इस प्लांट को प्रस्ताव मिलता था. इन कारखानों की बाय प्रोडेक्ट से संचालित टैनिन प्लांट और चर्म शोधनालय भी बंद हो चुका है. इसके संयत्र भी कबाड़ा हो चुके हैं. फिलहाल, इन प्लांट को दोबारा शुरू किये जाने की कोई पहल नहीं हो रही है. यदि ये प्लांट फिर से शुरू हो जाये, तो क्षेत्र के हजारों बेरोजगारों को रोजगार मिल सकेगा.
बिहार वन व्यापार निगम ने शुरू किया था प्लांट
सॉल्वेंट एवं टैनिन प्लांटों की स्थापना वर्ष 1989 में बिहार राज्य वन व्यापार निगम द्वारा की गयी थी. इस प्लांट में वनस्पति तेल का निर्माण किया जाता था. इसके उत्पादों को टैनिन करके विदेशों में भेजा जाता था.
तकरीबन 11.86 करोड़ रुपये वार्षिक टर्न ओवर के इस कारखाने से प्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष रूप से तकरीबन पांच हजार लोग जुड़े थे. इन प्लांटों के इंजीनियर वर्षों से बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपना परिवार चला रहे हैं. कई कारखाना कर्मी, तो बगैर किसी पावना के ही रिटायर हो चुके हैं. रख रखाव के अभाव में इसके संयत्र बेकार हो चुके हैं.

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