झुमरीतिलैया: श्रावणी मेले के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे ने कोडरमा होकर दो जोड़ी श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों के परिचालन को हरी झंडी दे दी है. इन ट्रेनों के चलने से कोडरमा, गोमो, हजारीबाग, नवादा, किउल, जमालपुर और सुलतानगंज के रास्ते देवघर जाने वाले कांवरियों को काफी राहत मिलेगी. इसकी जानकारी पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी सरस्वती चंद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी.
रेलवे के अनुसार गाड़ी संख्या 08690/08689 रांची-भागलपुर-रांची श्रावणी मेला स्पेशल का परिचालन 26 जुलाई से 9 सितंबर 2026 तक किया जाएगा. यह ट्रेन प्रत्येक रविवार और बुधवार को रांची से खुलेगी तथा बोकारो स्टील सिटी, गोमो, पारसनाथ, हजारीबाग रोड, कोडरमा, तिलैया, नवादा, शेखपुरा, किउल, जमालपुर और सुलतानगंज होते हुए भागलपुर पहुंचेगी. वापसी में यह ट्रेन 27 जुलाई से 10 सितंबर 2026 तक प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को भागलपुर से रांची के लिए चलेगी.
इसी प्रकार गाड़ी संख्या 08646/08645 रांची-भागलपुर-रांची श्रावणी मेला स्पेशल का परिचालन 27 जुलाई से 11 सितंबर 2026 तक प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को किया जाएगा. यह ट्रेन बरकाकाना, हजारीबाग टाउन, कोडरमा, तिलैया, नवादा, किउल, जमालपुर और सुलतानगंज होते हुए भागलपुर पहुंचेगी.
वापसी में यह ट्रेन 28 जुलाई से 12 सितंबर 2026 तक प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को भागलपुर से रांची के लिए चलेगी. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन विशेष ट्रेनों के परिचालन से श्रावणी मेले के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी तथा देवघर जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध होगी.
कोडरमा-मधुपुर पैसेंजर को रविवार को भी चलाने की उठी मांग
इधर, श्रीराम संकीर्तन मंडल के पूर्व अध्यक्ष मुन्ना भदानी, पूर्व सचिव अरविंद चौधरी एवं चंद्रशेखर जोशी ने रेलवे से कोडरमा-मधुपुर पैसेंजर ट्रेन को रविवार को भी चलाने की मांग की. प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को बताया कि यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलती है, जबकि रविवार को कोडरमा स्टेशन पर खड़ी रहती है.
पहले यह ट्रेन डीजल भराने के लिए गोमो और बरकाकाना जाती थी, लेकिन कोडरमा-कोवाड़-मधुपुर रेलखंड के विद्युतीकरण के बाद इसकी आवश्यकता नहीं रह गई है. ऐसे में श्रावणी मेले को देखते हुए 3 अगस्त से प्रत्येक रविवार को भी इस ट्रेन का परिचालन शुरू किया जाना चाहिए, ताकि कांवरियों को मधुपुर के रास्ते देवघर जाने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.
