कोडरमा से गौतम राणा की रिपोर्ट
Koderma Government Hospital, कोडरमा: झारखंड के कोडरमा प्रखंड अंतर्गत पत्थलडीह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से स्वास्थ्य व्यवस्था को धता बताती एक बेहद हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. मंगलवार की रात बिजली गुल रहने के कारण अस्पताल प्रबंधन ने एक गर्भवती महिला का प्रसव (Delivery) मोमबत्ती की रोशनी में कराने की तैयारी शुरू कर दी. इस बदहाली और भारी कुव्यवस्था को देखकर परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके बाद मुखिया प्रतिनिधि के नेतृत्व में आक्रोशित लोगों ने पीएचसी में ताला जड़ दिया.
मोमबत्ती के भरोसे प्रसव की तैयारी और सुरक्षित निकास
जानकारी के अनुसार, पत्थलडीहा पंचायत के गरायडीह की रहने वाली गर्भवती महिला नीलम कुमारी को प्रसव पीड़ा होने के बाद परिजन रात में पीएचसी लेकर पहुंचे थे. अस्पताल में उस वक्त बिजली नहीं थी और बैकअप की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई थी, जिसके बाद ड्यूटी पर तैनात एएनएम जनता देवी ने मोमबत्ती जलाकर प्रसव कराने की तैयारी शुरू कर दी. इस जोखिमभरी स्थिति को देखकर परिजनों ने तुरंत स्थानीय मुखिया को फोन किया और मौके पर पहुंचे मुखिया प्रतिनिधि सदानंद यादव और ग्रामीणों ने अस्पताल में ताला जड़कर प्रसूता महिला को तुरंत वहां से निकाला. इसके बाद उसे गांव के ही 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' ले जाया गया, जहां महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया और फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं.
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मुखिया का सिविल सर्जन को पत्र और गंभीर आरोप
इस घटना के बाद पत्थलडीहा पंचायत की मुखिया बैजयंति देवी ने कोडरमा के सिविल सर्जन (CS) को लिखित आवेदन देकर इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है. मुखिया ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि पत्थलडीहा पीएचसी में डॉक्टर कभी समय पर नहीं आते हैं और पूरा स्वास्थ्य केंद्र केवल लापरवाह कर्मियों के भरोसे चल रहा है. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि स्वास्थ्य केंद्र के बड़ा बाबू (प्रधान लिपिक) के कक्ष में इन्वर्टर का कनेक्शन मौजूद था, लेकिन उन्होंने प्रसव कक्ष की लाइन काट दी थी. रात में ग्रामीणों द्वारा अनुरोध किए जाने के बावजूद कमरे की चाभी देने से साफ इनकार कर दिया था.
चिकित्सा पदाधिकारी का आश्वासन और ताला खोलने की सहमति
अस्पताल में ताला बंद होने और हंगामे की खबर मिलते ही बुधवार की सुबह प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आरपी शर्मा तुरंत पत्थलडीह पीएचसी पहुंचे. उन्होंने वहां मौजूद आक्रोशित ग्रामीणों और मुखिया प्रतिनिधि को समझा-बुझाकर शांत कराया. चिकित्सा पदाधिकारी ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद ही ग्रामीणों ने शांत होकर पीएचसी का मुख्य ताला खोला.
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