..ग्रामीण क्षेत्रों में मोंथा तूफान से किसानों की चिंता बढ़ी (फोटो)

इस वर्ष बेहतर बारिश के कारण धान की बेहतर फसल की उम्मीद थी, धान लगा भी बेहतर था और पक कर तैयार था

राजेश सिंह

जयनगर. इस वर्ष बेहतर बारिश के कारण धान की बेहतर फसल की उम्मीद थी, धान लगा भी बेहतर था और पक कर तैयार था. एतवारी छठ के बाद पूरे रफ्तार में धन कटनी होती, मगर बंगाल की खांडी में उठे मोंथा तूफान ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. मंगलवार की देर शाम से बारिश हो रही है, खेत में लगे धान को बारिश की हवा से नुकसान हो रहा है. खेतों में बाली और धान सड़ने की संभावना बन गयी है. कई जगह पर फसल खेत में ही गिर गयी है. धन कटनी नहीं होने के कारण गेहूं की खेती भी पिछड़ रही है. बारिश के कारण आलू लगाने में पहले ही लेट हो चुका है. जिससे किसानों की चिंता और परेशानी बढ़ गयी है, परेशान किसानों ने इस पर अपनी अलग अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

भगवान और मौसम का खेल निराला है, पहले तो भरपूर बारिश हुई जिससे धान की शानदार फसल हुई, पर जब कटनी के समय आया तो बारिश के कारण ही कटनी संभव नहीं है, यदि शीघ्र कटनी नहीं हुई तो छोटे किसान बर्बाद हो जाएंगे. आलू और अन्य सब्जियां पहले से ही बर्बाद है, धान भी अब खतरे में आ गया.

———सुखदेव यादव, चरकी पहरी——–

——————————————————-

मौसम ऐसा ही रहा तो हम किसान लोग बर्बाद हो जाएंगे. बारिश के कारण धान हुआ और बारिश के कारण ही नुकसान हो रहा है. बारिश की वजह से हरी सब्जियां पहले ही बर्बाद हो चुकी है, आलू भी लेट से लगा पायें हैं. ऐसे में यदि मौसम में यदि सुधार नहीं हुआ तो धान की बर्बाद भी तय है, जो किसानों के लिए गंभीर समस्या है.

————–शिवकुमार यादव, खेडोबर———–

————————————————————-

किसानों के लिए राहत बनने वाला बारिश ही आफत बन गयी है. धान की फसल से बेहतर उम्मीद थी, कटनी का इंतजार था, कटनी के बाद खेत खाल होते ही गेहूं की बुआई करना था. मगर बेमौसम की बारिश ने सब गडबडा दिया है. गेहूं के लिए मौसम अनुकूल है, मगर खेत ही खाली नहीं है.

———-बुलाकी यादव, चरकी पहरी————

———————————————————————

पहले भी हमलोग बारिश से नुकसान उठाते रहे हैं, मगर धान के समय इस वर्ष जेठुआ सब्जी बर्बाद हुआ, आलू की फसल लेट से लगी, अब धन कटनी के समय भी परेशान है, मौसम नहीं सुधरा तो तैयार फसल की कटनी मुश्किल हो जाएगा. यदि सुरक्षित धान की कटनी नहीं हुई तो किसानों की कमर टुट जाएगी.

————–रामदेव यादव, कोसमाडीह———-

—————————————————————-

हमलोगों ने महंगे दर पर आलू की बीज खरीदकर लेट से आलू लगाया. मगर लगातार हो रही बारिश से बेहतर आलू की फसल की उम्मीद टुटने लगी है. वहीं अभी किसी किसान का खलिहान सूखा भी नहीं है, ऐसे में धन कटनी कर किसान धान को कहां रखे. इस समस्या के कारण धान कटनी भी नहीं कर पा रहे हैं.

————कन्हाय यादव, सोनपुरा———–

———————————————————–

क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ

इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र जयनगर कोडरमा के एग्रोफोरेस्टी ऑफिसर रूपेश रंजन ने बताया कि खेत में लगे धान के पौधों का खतरा कम है, मगर खेत में काटकर रखा धान नमी की वजह से सड सकता है, दाना काला हो सकता है, उन्होंने बताया कि 17 प्रतिशत से अधिक नमी होने पर धान नहीं बिकेगा, सरकार के नियमों अनुसार नमी की मात्रा अधिक होने पर धान की गुणवत्ता खराब हो सकती है, उसमें फफुुंद लग सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vikash nath

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >