प्रतिनिधि, कोडरमा: कस्टम्स के नये कार्यालय नोट से कोडरमा और गिरिडीह के अभ्रक कारोबार से जुड़े हजारों मजदूरों, छोटे प्रोसेसरों और निर्यातकों के सामने रोजगार व कारोबार का संकट गहराने की आशंका जतायी गयी है. इस मामले को लेकर अभ्रक स्क्रैप मजदूर संघ ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा.
संघ अध्यक्ष कृष्णा सिंह घटवार के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पुराने अभ्रक स्क्रैप से जुड़े मजदूरों और छोटी प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए कस्टम्स द्वारा मांगे गये दस्तावेज उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है. इससे छोटी इकाइयों के बंद होने और हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है. बाबूलाल मरांडी ने प्रतिनिधिमंडल को मामले में सहयोग का आश्वासन दिया.
ज्ञापन में कहा गया है कि असिस्टेंट कमिश्नर, स्पेशल इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशन ब्रांच (एसआइआइबी-पोर्ट), कस्टम हाउस, कोलकाता की ओर से तीन सितंबर 2026 को जारी कार्यालय नोट में कच्चे, क्रूड या सेमी-प्रोसेस्ड माइका के निर्यातकों से माइन सोर्स सर्टिफिकेट, माइनिंग ई-चालान अथवा ट्रांसपोर्ट चालान, टैक्स इनवॉइस और ई-वे बिल प्रस्तुत करने को कहा गया है. दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर मामलों को सत्यापन या आगे की कार्रवाई के लिए एसआइआइबी को भेजने का निर्देश दिया गया है.
संघ ने कहा कि वह अभ्रक की वैध सोर्सिंग और रॉयल्टी भुगतान का समर्थन करता है, लेकिन कार्यालय नोट के मौजूदा स्वरूप से पुराने अभ्रक स्क्रैप पर निर्भर मजदूरों और छोटी इकाइयों के सामने व्यावहारिक कठिनाई पैदा होगी. पुराने खनन से बचे अभ्रक को सतह से चुनने वाले मजदूरों के पास माइन सोर्स सर्टिफिकेट या माइनिंग ई-चालान उपलब्ध नहीं हो सकता है.
तीन प्रमुख मांगें रखीं
संघ ने तीन सितंबर के एसआइआइबी-पोर्ट कार्यालय नोट को तत्काल वापस लेने अथवा उस पर रोक लगाकर समीक्षा करने, अभ्रक निर्यात के लिए अतिरिक्त दस्तावेजी व्यवस्था केवल डीजीएफटी द्वारा हितधारकों से परामर्श के बाद निर्धारित करने तथा कोडरमा-गिरिडीह के अभ्रक मजदूरों, सतह चुनने वालों और छोटे प्रोसेसरों की आजीविका सुरक्षित रखने की मांग की.
प्रतिनिधिमंडल ने बाबूलाल मरांडी से मामले को केंद्रीय वित्त मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के समक्ष उठाने का आग्रह किया. ज्ञापन में कहा गया कि एचएस कोड 2525 के तहत अभ्रक वर्तमान निर्यात नीति में फ्री श्रेणी में है. इसमें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के 27 अगस्त 2026 के पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें अभ्रक की मौजूदा निर्यात नीति में बदलाव नहीं होने की बात कही गयी है.
