श्रद्धा व भक्ति में डूबा पूरा जैन समाज
झुमरीतिलैया : जैन समाज का दशलक्षण पर्यूषण महापर्व मंगलवार से विधि-विधान के साथ दोनों जैन मंदिरों में शुरू हुआ. सुबह छह बजे दोनों मंदिर की मूल वेदी 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान पर प्रथम अभिषेक व शांतिधारा का सौभाग्य अमरेश गंगवाल, राकेश छाबढ़ा, सुरेश झांझरी व प्रदीप छाबड़ा के परिवार को प्राप्त हुआ. सरस्वती भवन में सैकड़ों भक्तों द्वारा श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा पर महामस्तिकाभिषेक किया गया. जबलपुर से आये नरेश भइया ने शांतिधारा कराया.
इसका सौभाग्य पूरनमल संजय सेठी के परिवार को प्राप्त हुआ. नरेश भइया ने कहा कि इस दस दिनों में किया गया धर्म मनुष्य के जीवन में अनेक ऊर्जा व पुण्य प्रदान करती है. यह पर्व पूरे विश्व में मनाया जाता है. इस समय धर्म के हिसाब से किया व्यापार भी फलदायक होता है. इस समय सभी मनुष्य को अधिक से अधिक त्याग कर अपने जीवन में संयम का पालन करना चाहिए. आज दशलक्षण पर्व का प्रथम दिन उत्तम क्षमा का धर्म है.
उन्होंने कहा कि क्षमा भी एक तप है. इसमें तप कर यह जीव शुद्ध बनता है. सुबोध गंगवाल के संगीत से संगीतमय पूजन, दशलक्षण महामंडल विधान की पूजा की गयी. इसके पूर्नाजक पवन जैन को दीप प्रज्जवलित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. जबकि अशोक पटौदी व मंगल कलश की स्थापना कुसुम बड़जात्या, अर्चना गंगवाल, त्रिशला गंगवाल, आशा गंगवाल, प्रेम पांडया ने किया. समस्त कार्यक्रम पंडित अभिषेक जैन की देख-रेख में हो रहे हैं.
