कोडरमा : एक व्यक्ति पर दुष्कर्म का आरोप लगाकर गवाह परीक्षण के दौरान अपने बयान से महिला के मुकर जाने के मामले को स्थानीय अदालत ने गंभीरता से लिया है. अदालत ने बयान से पलटने वाली महिला से स्पष्टीकरण मांगते हुए जांच का आदेश दिया है. यही नहीं महिला के द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
कोडरमा : एक व्यक्ति पर दुष्कर्म का आरोप लगाकर गवाह परीक्षण के दौरान अपने बयान से महिला के मुकर जाने के मामले को स्थानीय अदालत ने गंभीरता से लिया है. अदालत ने बयान से पलटने वाली महिला से स्पष्टीकरण मांगते हुए जांच का आदेश दिया है. यही नहीं महिला के द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर या न्यायालय के संतुष्ट नहीं होने पर उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू करने की बात भी अदालत ने अपने आदेश में कही है.
कोडरमा जिले के न्यायिक इतिहास में इस तरह का यह पहला मामला है, जब किसी वादी के अपने बयान से मुकर जाने पर उसके विरुद्ध अदालत के द्वारा स्वत: संज्ञान लेते हुए कोई आदेश दिया गया हो. जानकारी के अनुसार जिला जज द्वितीय संजय कुमार सिंह की अदालत में एक महिला द्वारा लगाये गये दुष्कर्म के आरोप से संबंधित मामले की स्पीडी ट्रायल के तहत सुनवाई चल रही थी.
जगनगर के सांथ की रहने वाली 30 वर्षीय महिला ने पहले आरोप लगाया था कि 45 वर्षीय मुस्लिम खान (पिता स्व. सुली खान निवासी तरवण जयनगर) ने उसके साथ छुरा के बल पर दुष्कर्म किया. महिला ने अदालत में दिये 164 के बयान में भी इस घटना को लेकर यही बातें कही थीं. ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस को स्पीड ट्रायल के लिए चुनाते हुए सुनवाई शुरू की गयी थी.
सुनवाई के दौरान कुल आठ गवाहों का परीक्षण किया गया, लेकिन जब कांड की वादिनी महिला की गवाही का परीक्षण किया जा रहा था, तो महिला अपने पूर्व के बयान से पलट गयी. ऐसे में अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए जहां महिला से स्पष्टीकरण पूछने का आदेश दिया है, वहीं दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद मुस्लिम खान को रिहा करने का फैसला सुनाया. कोर्ट में यह सुनवाई बीते नौ अक्तूबर को हुई है.
दो बार दुष्कर्म करने का लगाया था आरोप
महिला ने सबसे पहले न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी विवेक कुमार की अदालत में 22-8-2017 को परिवाद पत्र संख्या 731/17 दायर किया था. उस समय आरोप लगाया गया था कि 21 जनवरी 2017 को सुबह 10-11 बजे वह अपने घर पर अकेले थी. सास व ससुर इलाज कराने गये थे. इसी दौरान आरोपी मुस्लिम घर पर आया और छुरा के बल पर दुष्कर्म किया.
किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी. इस घटना के पांच दिन बाद जब वह सांथ स्थित भट्टा वाला टांड़ पर गयी तो वहां भी आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया. उसने डर से किसी को घटना की जानकारी नहीं दी. घटना के बाद वह गर्भवती हो गयी तो आसपास के लोगों व परिवार के सदस्यों को शक हुआ. तब जाकर उसने पूरी जानकारी परिवार के लोगों को दी.
30-5-17 को महिला ने अल्ट्रासाउंड कराया, जिसके रिपोर्ट में 18 सप्ताह चार दिन का गर्भ बताया गया. परिवाद पत्र दायर करने के दौरान महिला का कहना था कि गर्भवती होने की जानकारी गांव में सब जान गये तो वह थाना गयी, लेकिन थाना प्रभारी ने उसे पंचायत में मामला निबटा लेने को कहा. पंचायत में इलाज का खर्च वहन करने व गर्भ में पल रहे बच्चे को मार देने की बात कही गयी, पर आरोपी मुकर गया. ऐसे में उसे वकालतन नोटिस भेजा. थक हार कर उसने परिवाद पत्र दायर किया. अदालत के आदेश पर पुलिस ने बाद में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.
चार्जशीट में पुलिस ने बताया था सत्य
महिला के परिवाद पत्र के आलोक में अदालत के आदेश पर पुलिस ने 3-9-2017 को थाना कांड संख्या 196/17 धारा 376 के तहत दर्ज किया था. इसके बाद जब अदालत में 164 का बयान हुआ तो उस समय भी महिला अपने बयान पर कायम रही और घटना को सत्य बताया. पुलिस ने मामले को लेकर सात दिसंबर 2017 को चार्जशीट दाखिल किया तो उसमें भी घटना को सत्य बताया गया.
मामला सत्य करार दिए जाने पर न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से उक्त केस जिला जल द्वितीय की अदालत को दौरा सुपुर्द कर दिया गया. दो फरवरी 2018 को न्यायाधीश संजय कुमार सिंह की अदालत ने मामले का स्पीड ट्रायल शुरू किया. आठ गवाहों के परीक्षण हुआ. इसमें बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह नहीं था, पर अंतिम समय में वादिनी अपने बयान से पलट गयी.