किस्को : कृत्रिम गर्भाधान केंद्र किस्को का लाभ किस्को प्रखंड के पशुपालकों को मिल रहा है. पशुपालक कृत्रिम गर्भाधान केंद्र में अपने दुधारू मवेशियों को लेकर पहुंच रहे हैं. गो पालन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है. पूरे क्षेत्र में पशुओं का इलाज एवं गर्भाधान का कार्य किया जा रहा है.
क्षेत्र के पशुपालक कृत्रिम गर्भाधान का लाभ उठा रहे है, बताया जाता है कि किस्को कृत्रिम गर्भाधान केंद्र में प्रखंड क्षेत्र के किस्को, होंदगा, जोरी, आनंदपुर, परहेपाठ, हुआहार सहित विभिन्न गांवों में पशुपालन संबंधित समस्याओं का समाधान किया जा रहा है. किसानों को पशुपालन संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए परेशानियां नहीं होती है, लोग अब अधिक से अधिक पशुपालन कर दूध उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
लोगों का कहना है कि हर क्षेत्र में डॉक्टर इलाजरत रहते हैं. पशु संबंधित हर रोग का इलाज किया जाता है. किसानों को कृमिनाशक, जनेवा, अल्पेडाजोल, फेनाजोल, लिभ फिफ्टी टू, कैल्शियम, मिनरल, और भी पशु संबंधित विभिन्न प्रकार की दवाइयां पशुपालकों को मुफ्त में दी जा रही है. इस संबंध में प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय के भ्रमण शील चिकित्सक मुरली मनोहर पांडेय ने बताया कि दूध उत्पादन क्षेत्र में किस्को प्रखंड के किसान गौ पालन करते हुए रोजगार पा रहे है.
पहले जहां पूजा करने के लिए दूध नहीं मिल पाता था. वर्तमान समय में किस्को प्रखंड से सैकड़ों लीटर दूध डेयरी उत्पाद के मध्यम से बेच रहे हैं. डेयरी द्वारा किसानों के घर तक जाकर दूध लिया जा रहा है. डेयरी में दूध बेचने से किसानों को उचित मूल्य भी मिल जाता है. गौ पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार 90 प्रतिशत सब्सिडी में बीपीएल परिवारों को दो दुधारू मवेशी अनुदान में दे रही है.
श्वेत क्रांति की दिशा में किस्को प्रखंड के गो पालक बेहतर काम करते हुए अपने एवं अपने परिवार का जीविकोपार्जन चला रहे हैं. किस्को प्रखंड के जनवल गांव निवासी जेरका महतो ने बताया कि चार साल पहले जीविकोपार्जन के लिए काफी परेशानी होती थी. जब से गौपालन कर रहे है. परिवार की परिस्थितियों में सुधार आया है.
