जांच के लिए डोमचांच पहुंचे पदाधिकारी, मौत के बाद परिजनों का हाल-बेहाल
झुमरीतिलैया : नर्स द्वारा इंजेक्शन दिये जाने के कुछ घंटे बाद ही मंगलवार को एक युवक की मौत हो गयी. मौत के बाद युवक के परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया. मृतक की पहचान 28 वर्षीय उमेश कुमार शर्मा (पिता- स्व बंधन राणा), निवासी गेंदवाडीह कोडरमा के रूप में हुई है. लापरवाही से हुई मौत व परिजनों द्वारा हंगामा किये जाने की सूचना पर कार्यपालक दंडाधिकारी संतोष कुमार सिंह, सीओ अशोक राम, तिलैया थाना प्रभारी राज वल्लभ पासवान जांच के लिए पहुंचे. समाचार लिखे जाने तक पदाधिकारियों की जांच जारी है. पूरे मामले में करीब 10 माह पूर्व प्रशासन की ओर से नियमों का पालन नहीं करने के आरोप में सील किये गये डोमचांच के अपोलो हेल्थ केयर पर सवाल उठे है.
आरोप है कि इस अस्पताल में नर्स द्वारा दो इंजेक्शन देने के कारण युवक की हालत बिगड़ी और जब युवक को तिलैया स्थित कोडरमा नर्सिंग होम लाया गया, तो यहां उसने दम तोड़ दिया. जानकारी के अनुसार मृतक के भाई दिनेश कुमार राणा ने तिलैया थाना प्रभारी के नाम पर लिखित आवेदन दिया है. इसमें दिनेश ने बताया है कि उसके भाई उमेश को सुबह में शरीर व सीने में दर्द की शिकायत हुई. ऐसे में गांव के दोस्त महेश को बुला कर अपोलो हेल्थ केयर डोमचांच पहुंचे. यहां संजय (पिता- डाॅ भगवान) ने मेरे भाई को नर्स से इंजेक्शन लगवाने को कहा. नर्स ने हाथ व कमर में इंजेक्शन लगाया.
इंजेक्शन लगाने के बाद ही मेरे भाई की स्थिति गंभीर हो गयी. संजय को बताया, तो थोड़ी देर रुकने को कहा. थोड़ी देर बाद डाॅ भगवान ने आकर कोडरमा नर्सिंग होम का कार्ड थमाया और ले जाने को कहा. अस्पताल में हमें किसी तरह की पर्ची व स्लीप भी नहीं दिया की क्या उपचार किया. जब हम भाई को लेकर कोडरमा नर्सिंग होम पहुंचे, तो डाॅक्टर ने स्लाइन चढ़ाना शुरू किया. कुछ मिनट में ही भाई ने दम तोड़ दिया. आवेदन में कहा गया है कि जिस समय वह भाई को लेकर गांव से अपोलो हेल्थ केयर गया था, वह चल रहा था और मोटरसाइकिल पर बैठ कर आया था. इंजेक्शन देने के बाद हालत गंभीर हुई व वह बेहोश हो गया. मेरे भाई की किसी बीमारी से नहीं, बल्कि लापरवाही से हुए इलाज व गलत इंजेक्शन के कारण जान गयी है.
21 सितंबर 2017 को सील किया गया था अस्पताल
क्लिनिकल एस्टीब्लिसमेंट एक्ट का पालन नहीं करने व जांच के दौरान मिली गड़बड़ी के बाद जिला प्रशासन ने 21 सितंबर 2017 को डोमचांच में संचालित अपोलो हेल्थ केयर को सील किया था. इस निजी क्लिनिक को सील करने के लिए उस समय एसडीओ प्रभात कुमार बरदियार, तत्कालीन सीएस डाॅ बीपी चौरसिया व अन्य पहुंचे थे. कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अस्पताल के तीन कमरे, जिसमें ओपीडी, लेबर रूप व ऑपरेशन थियेटर संचालित हो रहा था,
उसे सील कर दिया गया था. हालांकि, अन्य सेंटर को सील करने की कार्रवाई नहीं की जा सकी थी. इससे पूर्व 29 अगस्त को तत्कालीन डीसी संजीव कुमार बेसरा के निर्देश पर गठित जांच दल ने अस्पताल में बिना डाॅक्टर की मौजूदगी के मरीजों का इलाज किये जाने व एक महिला का गर्भपात कराये जाने की बात पकड़ी थी. यहीं नहीं टीम ने जांच के दौरान पाया था कि संचालक भगवान प्रसाद अधिकतर मरीजों का इलाज स्वयं करते है. जांच टीम ने मिली कई गड़बड़ियों की रिपोर्ट में जिक्र करते हुए डीसी को जानकारी दी थी.
सिविल सर्जन समेत अन्य ने की जांच
मामले की जांच के लिए सीएस डाॅ योगेंद्र महतो, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ रंजीत कुमार, डाॅ मनोज कुमार, कार्यपालक दंडाधिकारी संतोष कुमार, स्वास्थ्य विभाग के संजय कुमार शाम में अपोलो हेल्थ केयर पहुंचे. उन्होंने मामले को लेकर जानकारी लेने का प्रयास किया व मेडिकल में भी जांच की, पर विशेष कुछ हासिल नहीं हुआ. जांच टीम ने यहां एक कमरे में पांच से सात बेड लगा पाया. पूछे जाने पर सीएस ने बताया कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. मामले की जांच की जा रही है.
आरोप निराधार, नहीं लगाया गया कोई इंजेक्शन
इधर, अपोलो हेल्थ केयर के संजय कुमार ने लगाये गये आरोपों को निराधार बताया है. उनके अनुसार अस्पताल कई माह से सील है. ऐसे में कोई मरीज का इलाज नहीं होता. सिर्फ मेडिकल का संचालन किया जाता है और ओपीडी में डाॅक्टर रहने पर मरीज को देखा जाता है. सुबह के समय में जब उक्त युवक को लाया गया था, तब कोई इलाज नहीं किया गया और न ही कोई इंजेक्शन लगाया गया. युवक को बाहर ले जाने के लिए कहा गया था. उसकी मौत दूसरे नर्सिंग होम में कैसे हुई यह नहीं बता सकते.
