खलारी. अप्रैल के मध्य तक पहुंचते-पहुंचते खलारी कोयलांचल में सूरज की तपिश ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है. दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाने से क्षेत्र की जीवनदायिनी नदियां और भू-जलस्तर तेजी से प्रभावित होने लगे हैं. हालांकि वर्तमान में सपही नदी की धारा प्रवाहित है और जलापूर्ति जारी है, लेकिन दामोदर और सोनाडुबी जैसी नदियों की स्थिति चिंताजनक हो गई है. जानकारों का मानना है कि यदि गर्मी की यही तीव्रता बनी रही, तो अगले 20 से 22 दिनों के भीतर पूरे प्रखंड क्षेत्र में पेयजल के लिए भीषण संकट खड़ा हो सकता है. नदियों के भरोसे चल रहे वाटर फिल्टर प्लांट अब पूरी तरह संकट के मुंहाने पर खड़े हैं.
करोड़ों का फिल्टर प्लांट, क्षमता से 100 गुना कम हो रही आपूर्ति
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा बुकबुका में स्थापित 55 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला फिल्टर प्लांट वर्तमान में अपनी क्षमता के अनुरूप सेवा देने में विफल साबित हो रहा है. करंजतोरा स्थित सपही नदी के इंटकवेल से इस प्लांट को पानी मिलता है, जहां से दो बड़े जलमीनारों (16-16 हजार लीटर क्षमता) को भरा जाता है. स्थिति यह है कि जब पांच बार इन जलमीनारों का टैंक भरा जाता है, तब जाकर पांचों पंचायतों के ग्रामीणों को एक बार पानी नसीब होता है. वर्तमान में लोगों को एक-एक सप्ताह के अंतराल पर पानी मिल रहा है. यदि सपही नदी का जलस्तर थोड़ा और गिरा, तो प्लांट को पूरी तरह बंद करने की नौबत आ सकती है.
चूना पत्थर जलाशय है संजीवनी, पर प्रशासन की सुस्ती बरकरार
खलारी के इस संकट का एकमात्र स्थायी समाधान फिल्टर प्लांट से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित चूना पत्थर की बंद खदान (जलाशय) है. इस विशाल जलाशय में सालों भर प्रचुर मात्रा में पानी जमा रहता है. यदि इस पानी को फिल्टर प्लांट से जोड़ दिया जाए, तो पूरे क्षेत्र की प्यास बुझ सकती है. गौर करने वाली बात यह है कि पूर्व में डीडीसी ने खुद इस जलाशय का निरीक्षण किया था और इसे जलापूर्ति से जोड़ने पर अपनी सहमति भी दी थी. इसके बावजूद, अब तक धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं होना विभागीय उदासीनता को दर्शाता है.
कोयला खदानों की मार से फेल हो रहे सोलर जलमीनार
नदियों के सूखने के साथ-साथ भू-जलस्तर में भी रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की जा रही है.खलारी कोयलांचल में गहराती खदानों के कारण प्राकृतिक जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं. प्रखंड के गली-मोहल्लों में लगे दर्जनों सोलर जलमीनार अब शो-पीस बनकर रह गए हैं. जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि बोरिंग के पाइप अब पानी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण बाल्टियां लेकर पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं.
प्रशासन रेस : हर हाल में सुनिश्चित हो जलापूर्ति, कोताही बर्दाश्त नहीं
गहराते संकट को देखते हुए प्रखंड प्रशासन हरकत में आया है. हाल ही में बीडीओ ने प्रखंड सभागार में पेयजल की उपलब्धता पर विशेष समीक्षा बैठक की. उन्होंने पंचायतों में खराब पड़े चापानलों की अविलंब मरम्मत और जलमीनारों को सुचारू बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं. बीडीओ ने सभी मुखियाओं को स्पष्ट कहा है कि गर्मी के दौरान ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना न पड़े. अब सबकी नजरें 21 अप्रैल को होनेवाली आगामी बैठक पर टिकी हैं, जहां जलापूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
55 लाख लीटर क्षमता वाले प्लांट से मिलता है महज छह हजार लीटर पानी
जलापूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर 21 को होगी प्रशासन की बैठक
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