बुंडू. बुंडू में विभिन्न आदिवासी संगठनों आदिवासी सेवा संस्था ताऊ, पीपीके कॉलेज आदिवासी छात्रावास, मुंडा कॉलोनी, एसएस बालक छात्रावास, सरना स्थल बुंडू, दाडीलौग टुंगरी डामारी, एदेलहातु, बेसरा टोली, भाभरी आदि सरना स्थल से भव्य शोभायात्रा निकाली गयी. शोभायात्रा में इतनी भीड़ उमड़ी की बुंडू नगर की सड़कें छोटी पड़ गयीं. शोभायात्रा बुंडू स्थित मौसीबाड़ी गिड़ीबा स्थल पर पूजन अर्चना के बाद विसर्जन के साथ समाप्त हुई. इस अवसर स्थानीय विधायक विकास कुमार मुंडा शामिल हुए. उन्होंने सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है. इसके साथ ही आनेवाली पीढ़ियों तक अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है. विभिन्न वक्ताओं ने अपने संबोधन में सरहुल पर्व को आदिवासी समाज का वसंतोत्सव बताया. इसके पूर्व विभिन्न सरना स्थलों में पारंपरिक रूप से पूजन अर्चन कर प्रसाद का वितरण किया गया.
बुंडू में निकली सरहुल की शोभायात्रा, ढोल मंदार से खूब थिरके लोग
शोभायात्रा बुंडू स्थित मौसीबाड़ी गिड़ीबा स्थल पर पूजन अर्चना के बाद विसर्जन के साथ समाप्त हुई.
