खूंटी. मुरहू के पेरका स्थित लीड्स रिसोर्स सेंटर में रविवार को लीड्स और ब्रेड फॉर द वर्ल्ड के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षा अधिकार अधिनियम, नयी शिक्षा नीति 2020, मिशन वात्सल्य और एसडीजी पर राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में सिमडेगा, लातेहार, पश्चिम सिंहभूम, रांची और खूंटी के पंचायत प्रतिनिधि और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया. इस अवसर पर लीड्स के निदेशक एके सिंह ने कहा कि ज्यादातर बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हैं. राज्य में लगभग 65 प्रतिशत बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ते हैं और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के 36 सूचकों का अनुपालन सिर्फ 15 प्रतिशत स्कूल ही करते हैं. सरकारी स्कूल अभी भी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं. उन्होंने नयी शिक्षा नीति के बारे में बताया. कहा कि बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिले इसके लिए शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण पर भी नीति में कहा गया है. कर्रा सोसाइटी के प्रतिनिधि तबिश ने कहा कि बच्चों का बौद्धिक विकास के लिए तीन से छह वर्ष की आयु काफी महत्वपूर्ण है. जन शिक्षण संस्थान के प्रतिनिधि शशि प्रकाश ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित होना होना जरूरी है. मैजिक बस फाउंडेशन के प्रतिनिधि मुकेश ने कहा कि समुदाय के प्रतिनिधि के तौर पर विद्यालय प्रबंधन समिति की जिम्मेवारी बनती है कि शिक्षा के विकास के लिए उनके द्वारा पहल की जाये. सम्मेलन में सभी प्रतिभागियों के विचार और सुझावों पर चर्चा की गयी. इस अवसर सभी बच्चों का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने के लिए गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रयास करने और ड्राप आउट बच्चों को चिन्हित कर उनको स्कूल से पुनः जोड़ने का निर्णय लिया गया. इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
राज्य के ज्यादातर बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित : एके सिंह
राज्य स्तरीय सम्मेलन में शिक्षा को लेकर विशेषज्ञों ने किया मंथन
