तोरपा. कृषि विज्ञान केंद्र खूंटी द्वारा गाजरघास जागरूकता सप्ताह के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया. अभियान के तहत केंद्र विज्ञान केंद्र परिसर सहित कोरला, किन्सूटोली, झटनीटोली, बड़काटोली आदि जगहों पर किसानों को गाजरघास के हानिकारक प्रभाव एवं उसके प्रबंधन के बारे में जागरूक किया गया.
एक्जिमा, एलर्जी तथा अस्थमा जैसी बीमारियां
केंद्र के अध्यक्ष डॉ दीपक राय ने बताया, इस अभियान की सफलता के लिए केंद्र के वैज्ञानिक गांवों में पहुंचकर किसानों को जागरूक कर रहें हैं. डॉ राय ने कहा, पार्थेनियम एक बहुत ही हानिकारक खरपतवार है, जिससे मनुष्यों में एक्जिमा, एलर्जी तथा अस्थमा जैसी बीमारियां होती है, साथ ही यह पशुओ की लिए भी हानिकारक होता है.डॉ निखिल राज एम ने बताया कि गाजर घास के जैविक नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाइकोलोराटा ) कीट के उपयोग से पौधे की पत्तियों को नष्ट किया जा सकता है.
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गाजर घास की पहचान करायी
इसके प्रयोग से पौधे कमजोर हो जाते हैं व उनका विकास रुक जाता है.डॉ बृजराज शर्मा ने बताया यह खरपतवार फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है, जिससे उत्पादन में गिरावट आती है.डॉ प्रदीप कुमार ने पार्थेनियम को हटाने व इससे गांव को मुक्त करने पर जोर दिया. डॉ ओम प्रकाश कंटवा ने गाजर घास के फूल आने से पहले पौधों को उखाड़ कर खाद बनाने की बात बताई. कार्यक्रम में वैज्ञानिकों व कर्मचारियों ने लोगों को केवीके परिसर से लेकर आसपास के गांवों में गाजर घास की पहचान करायी गयी. पहचान के बाद पौधे को उखाड़कर गड्ढे में डाला और ऊपर से मिट्टी भर दी गयी.कार्यक्रम में केंद्र के डॉ मीर मुनीब रफ़ीक, डॉ किशोर सहित ग्रामीण व किसान उपस्थित थे.
