खूंटी में पेसा कानून को लेकर कांग्रेस की बैठक, जल्द नियम लागू कराने का लिया गया निर्णय

खूंटी में आदिवासी कांग्रेस कमेटी ने पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक गोष्ठी का आयोजन किया. बैठक में इस कानून को झारखंड में अविलंब लागू करने की मांग की गई.

खूंटी. आदिवासी कांग्रेस कमेटी के बैनर तले मंगलवार को सांसद कालीचरण मुंडा के आवासीय कार्यालय परिसर में पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गोष्ठी सह बैठक आयोजित की गयी. बैठक में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सभी प्रकोष्ठों की कोऑर्डिनेटर दयामनी बारला, जिला अध्यक्ष रवि मिश्रा, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज उरांव, प्रदेश संगठन महासचिव सुनीत शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता और विधानसभा प्रभारी हिमांशु मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

जल, जंगल, जमीन और स्वशासन के अधिकार की आत्मा है पेसा कानून

वक्ताओं ने कहा कि पेसा कानून आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और स्वशासन के अधिकार की आत्मा है. झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इसका सही रूप से लागू नहीं होना आदिवासी अस्मिता के साथ अन्याय है. बैठक में सर्वसम्मति से पेसा कानून के नियमों को अविलंब झारखंड में लागू करने के लिए सरकार से आग्रह करने का निर्णय लिया गया.

साथ ही ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने के लिए पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चलाने और पूरे झारखंड के सभी जिलों में पेसा कानून को लेकर इसी तरह की गोष्ठियां आयोजित करने का निर्णय लिया गया. मौके पर आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विलसन तोपनो, जिला कार्यकारी अध्यक्ष एलेक्सियूस परधिया, बसंत बालमुचू, रोयल बाखला, संदीप सांगा, अल्बर्ट होरो, भीमसेंट लोहरा, बिनसाय मुंडा, जोसेफ होरो, ओन हेरेंज सहित अन्य उपस्थित थे.

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By चंदन कुमार

चंदन कुमार खूंटी के ब्यूरो प्रभारी हैं और उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने वर्ष 2010 में खूंटी से पत्रकारिता की शुरुआत की और वर्ष 2017 में प्रभात खबर से जुड़े. लंबे समय से खूंटी जिले में सक्रिय पत्रकारिता के कारण उन्हें जिले के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों की गहरी समझ और मजबूत पकड़ है.

चंदन कुमार नक्सली घटनाओं, आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों, सामाजिक सरोकारों और जिला प्रशासन की गतिविधियों सहित जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों को प्रमुखता से कवर करते हैं. क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को सामने लाने और आम लोगों की आवाज को प्रमुखता देने वाली उनकी पत्रकारिता उनकी खास पहचान है.

खूंटी की स्थानीय परिस्थितियों और संवेदनशील मुद्दों की समझ के साथ वे तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं.

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