प्रकृति पर्व है सरहुल : सोमा कंडीर

खूंटी : सरना धर्म सोतो समिति की ओर से डौगड़ा में गुरुवार को सरहुल महोत्सव धूमधाम से मनाया गया. इसकी शुरुआत सरना में पारंपरिक विधि-विधान से सिंगबोंगा की पूजा-अर्चना के साथ हुई. पाहनों ने क्षेत्र में सुख, शांति व समृद्धि की कामना की गयी. धर्मगुरु सोमा कंडीर ने कहा कि प्रकृति के स्वागत का त्योहार […]

खूंटी : सरना धर्म सोतो समिति की ओर से डौगड़ा में गुरुवार को सरहुल महोत्सव धूमधाम से मनाया गया. इसकी शुरुआत सरना में पारंपरिक विधि-विधान से सिंगबोंगा की पूजा-अर्चना के साथ हुई. पाहनों ने क्षेत्र में सुख, शांति व समृद्धि की कामना की गयी. धर्मगुरु सोमा कंडीर ने कहा कि प्रकृति के स्वागत का त्योहार है सरहुल. इससे आपसी एकता व भाईचारगी को बढ़ावा मिलता है.
त्योहार प्रकृति की रक्षा का संदेश भी देता है. सरहुल वास्तव में मिलन की संस्कृति है. बगराय ऑड़ेया ने कहा कि सरहुल में नृत्य की गति है, लय है, जीवन है. सरहुल प्रकृति प्रेम का वास्तविक त्योहार है. उन्होंने सरकारी अवकाश पर सभी जगह एक साथ त्योहार को मनाने पर बल दिया. मौके पर डौगड़ा, डेहकेला, मुरुद, डोल्डा, गोवा, बुड़जू के सैकड़ों की संख्या में धर्मावलंबी पारंपरिक वेश-भूषा व गाजे-बाजे के साथ जश्न में शामिल हुए. सभी त्योहार को लेकर काफी हर्षित थे. डौगड़ा से कूदासूद तक विशाल शोभायात्रा निकाली गयी. अव्वल नृत्य पेश करनेवाले मंडली को पुरस्कृत किया गया.
सरना धर्म सोतो समिति के तत्वावधान में भी लोटा-जराकेल, बिरबांकी, सोंगरा, उलीहातू, बालो, कामडा में भी सरहुल धूमधाम से मनाया गया.
महोत्सव में शामिल लोग: मौके पर भैयाराम ऑड़ेया, मथुरा कंडीर, सुगना पाहन, लाल सहाय पाहन, मंगरा पाहन, मंगन ऑड़ेया, किसंड़ा ऑड़ेया, बिरसा कंडीर, रमदी मुंडू, विष्णुचंद्र कंडीर, सोमा मुंडा, लोर सिंह मुंडा, सिनू मुंडा, मदियाना धान आदि गणमान्य उपस्थित थे.

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