खूंटी : गोल्डेन आवर सिस्टम के तहत दुर्घटना में घायल लोगों को जल्द चिकित्सा सेवा मिल जाती है. जिससे उनकी जान बच जाती है. खूंटी में यह सिस्टम शुरू कर कई लोगों की जान बचायी जा सकती है.
खूंटी में प्रतिवर्ष 50 से ज्यादा लोग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं. कारण कि दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सेवा नहीं मिलती. एंबुलेंस या पुलिस के आने तक काफी समय गुजर जाता है. इस बीच कई घायल दम तोड़ देते हैं. इसे देखते हुए लोगों ने उपायुक्त व एसपी से रांची की तरह खूंटी में भी गोल्डन आवर सिस्टम शुरू करने की मांग की है. उनका कहना है कि यह सिस्टम शुरू हुआ, तो दुर्घटना में मृतकों की संख्या मेें काफी कमी आयेगी.
क्या है गोल्डेन आवर सिस्टम : इसके लिए पुलिस कंट्रोल रूम को 100 नंबर की सुविधा शुरू करनी होगी. यह इमरजेंसी कॉल होता है, जो हमेशा नेटवर्क में चालू रहता है. सिस्टम के तहत सड़क दुर्घटना वाले क्षेत्र के निकटवर्ती अस्पतालों को चिह्नित किया जायेगा. 100 नंबर या पुलिस कंट्रोल रूम में दुर्घटना की सूचना मिलते ही उस क्षेत्र के नजदीकी अस्पताल को सूचित किया जायेगा. अस्पताल का एंबुलेंस पांच से 10 मिनट में पहुंचेगा व घायलों को अस्पताल लाकर इलाज शुरू कर दिया जायेगा.
क्या है वर्तमान व्यवस्था : कहीं दुर्घटना हुई, तो सदर अस्पताल या पुलिस को खबर करना पड़ता है. खूंटी से घटनास्थल तक आने में काफी समय बरबाद हो जाता है व घायलों की जान खतरे में पड़ जाती है. हालांकि पुलिस हमेशा घटनास्थल पर पहुंचती है पर दूरी के कारण विलंब भी होता है. हाल ही में खूंटी के पैथोलॉजिस्ट बाबू की मौत इसका उदाहरण है.
कुछ को छोड़ बाकी एंबुलेंस गायब : जिला में करीब 50 एंबुलेंस सरकारी व जनप्रतिनिधि कोष से विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं को दिये गये हैं. सदर अस्पताल, अंगराबाड़ी, जीइएल, एसजीवीएस, रेफरल अस्पताल तोरपा, सरना समाज मारंगहादा के एंबुलेंस को छोड़ कर बाकी एंबुलेंस कहां है, इसका पता नहीं है. जिला के वरीय अधिकारियों ने भी इसकी जांच अब तक जरूरी नहीं समझी. कई संस्था तो प्रदत्त एंबुलेंस का उपयोग निजी कार्य में करते हैं.
नयी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त : प्रदेश पुलिस द्वारा खूंटी थाना को हाइवे पेट्रोलिंग के लिए दो माह पूर्व नयी टाटा सफारी गाड़ी मिली थी. एक सप्ताह बाद ही उक्त गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होकर खटारे में तब्दील हो गयी. यह दुबारा सड़क पर नहीं उतरी.
