डकरा : सीसीएल की पायलट प्रोजेक्ट और एनके एरिया का एकमात्र भूमिगत कोयला खदान से नौ अप्रैल को 800 टन कोयला निकाला गया है. पिछले 40 साल के इतिहास में ऐसा पहला मौका है जब एक दिन में चूरी खदान से इतना कोयला निकाला गया हो.
ज्ञात हो कि यहां का कोयला बी ग्रेड का है और खुली कोयला खदान की अपेक्षा यहां का कोयला पांच से छह गुणा महंगा बिकता है. कंटिन्यूअस माइनिंग मशीन लगने के बाद इसका असर अब चूरी में दिखने लगा है. आठ अप्रैल को 500 टन और 10 अप्रैल को दूसरी पाली समाप्त होने के पहले लगभग 500 टन कोयला निकाला जा चुका था.
यहां काम कर रहे जॉय माइनिंग और सीसीएल के अधिकारियों ने बताया कि एक दिन में सबसे अधिक 5350 टन कोयला इसीएल कंपनी की परियोजना झांझरा का रिकॉर्ड है. यहां भी जॉय माइनिंग ही काम कर रही है. झांझरा और चूरी को जाननेवाले अधिकारी बताते हैं कि एक दिन में सबसे अधिक कोयला निकालने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड चूरी में अगले दो चार महीने में बनने की पूरी संभावना है.
यहां कन्वेयर बेल्ट ठीक से चलने लगा तो चूरी का नाम भूमिगत कोयला खदान के क्षेत्र में पूरे भारत में एक अलग पहचान के रूप में बन सकता है. फिलहाल चूरी के लिए बने इस नये रिकॉर्ड से कर्मी उत्साहित हैं. एक दिन में यहां का पुराना रिकॉर्ड 450 टन का था.
