चंदन
खूंटी : खूंटी लोकसभा क्षेत्र के कई दिग्गज चुनाव जीतते रहे हैं. जयपाल सिंह मुंडा के बाद कड़िया मुंडा इस क्षेत्र का नेतृत्व कर कर रहे हैं. जयपाल सिंह मुंडा की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर की थी. कड़िया मुंडा भाजपा और जनसंघ के संस्थापकों में से थे. कई बार केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे. लोकसभा में उपाध्यक्ष भी बनाये गये. इसके बावजूद जल-जंगल बहुल इस संसदीय क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या पलायन है.
यहां की लड़कियां रोजगार खोजने घर छोड़ कर चली जाती है. आर्थिक और शारीरिक शोषण की शिकार होती है. इसके पीछे कारण है कि इस संसदीय क्षेत्र में रोजगार सृजन की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी. खूंटी जिलेवासियों के लिए नॉलेज सिटी किसी ड्रीम प्रोजेक्ट से कम नहीं रही है़
इतने वर्षों के बाद भी यहां केवल आधारशिला ही रखी गयी है. यहां कई शिक्षण संस्थानों के खुलने की उम्मीद थी. इससे रोजगार की संभावना बढ़ती. लोकसभा क्षेत्र में शैक्षणिक माहौल नहीं है. खूंटी जिले में एक मात्र सरकारी कॉलेज बिरसा कॉलेज है़ इसकी भी स्थिति खराब है़ बिरसा कॉलेज में एक साथ इंटर, स्नातक और महिला कॉलेज संचालित होती है़ यहां 12 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. इसके बाद भी ये कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया है़ रोजगार, पलायन, डायन-बिसाही (अंधविश्वास) की समस्या इतने वर्षों के बाद भी जस की तस है.
सड़क और बिजली पहुंची गांवों तक
विकास के नाम पर जिले में सभी ओर सड़कों का जाल बिछ गया है़ लगभग सभी गांवों तक बिजली पहुंचा दी गयी है़ खूंटी को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है़ खूंटी कई वर्षों तक उग्रवाद और नक्सलवाद की समस्या से घिरा रहा है़. कोई भी उम्मीदवार इसे अपना चुनावी मुद्दा बनाने से घबराता है. इसके बाद भी हाल के दिनों में उग्रवाद-नक्सलवाद में काफी कमी आयी है़ जिले में अफीम की खेती की समस्या विकराल होती जा रही है़
पेयजल नहीं पहुंचा सिमडेगा में
सिमडेगा जिले का बड़ा इलाका खूंटी संसदीय क्षेत्र में पड़ता है. ईसाई बहुल सिमडेगा आज भी पेजयल समस्या से जूझ रहा है. यहां के लोगों को पीने का शुद्ध पानी तक नहीं मिलता है. इससे लोगों को परेशानी हो रही है. इस समस्या को लेकर कई बार सिमडेगा शहरी क्षेत्र के लोगों को आवाज उठायी है. इसको दूर करने के लिए सरकार की ओर से किये गये गये प्रयास को अब तक सफलता नहीं मिल पायी है.
