तेली जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे सरकार

खूंटी: झारखंड अलग राज्य बना, पर तेली जाति के लोगों को उचित हक अब तक नहीं मिला. तेली प्राचीन काल से आदिवासियों की तरह रहन-सहन व संस्कृति का पालन करते आ रहे हैं. झारखंड सरकार अविलंब तेली जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे. उक्त बातें रविवार को खूंटी क्लब में छोटानागपुरिया तेली उत्थान समाज […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 6, 2017 1:16 PM

खूंटी: झारखंड अलग राज्य बना, पर तेली जाति के लोगों को उचित हक अब तक नहीं मिला. तेली प्राचीन काल से आदिवासियों की तरह रहन-सहन व संस्कृति का पालन करते आ रहे हैं. झारखंड सरकार अविलंब तेली जाति को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे. उक्त बातें रविवार को खूंटी क्लब में छोटानागपुरिया तेली उत्थान समाज का एकदिवसीय सम्मेलन में केंद्रीय अध्यक्ष कामेश्वर महतो ने कही.

उन्होंने कहा कि शुरू से तेली जाति के लोग जो उपेक्षित जीवन जी रहे हैं. वे भी विकास के पायदान पर आगे आ सकेंगे, जब सरकार तेली समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देगी. जिला में पिछड़ी जाति की आबादी को शून्य दिखाना सरकार की नाइंसाफी है. छोटानागपुर तेली उत्थान समाज के उपाध्यक्ष अरुण साहू ने कहा कि तेली जाति की संख्या आदिवासियों से कम नहीं है. इसके बावजूद जाति के लोगों को अबतक हक व अधिकार से महरूम रखना उचित नहीं है.

तेली समाज के लोग अपने हक एवं अधिकार के लिए जागृत हो चुके हैं. हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक की उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा न मिले. श्री साहू ने परिसीमन को शीघ्र लागू करने की मांग की. हरिशचंद्र कश्यप, किशोर गौंझू, लक्ष्मी प्रसाद ने कहा कि झारखंड के ट्राइबल इंस्टीट्यूट ने अपने सर्वेक्षण में राज्य सरकार को लिखा है कि तेली समाज का रहन-सहन, संस्कृति पूरी तरह आदिवासियों की तरह है.

राज्य सरकार ने इस बाबत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजा है. राजकिशोर गौंझू, शिवनारायण गौंझू, अनिल कश्यप ने कहा कि तेली जाति के लोगों ने हक व अधिकार के लिए जो एकजुटता का परिचय दिया है, वह सफलता के लिए मील का पत्थर साबित होगा. कैलाश महतो, लूरका महतो, शंकर महतो ने कहा कि सरकारी उपेक्षा के कारण आजादी के बाद आज भी तेली समाज के लोग उपेक्षित जिंदगी जी रहे हैं. सम्मेलन में मैनेजर साहू, शिवचरण साहू, नीलांबर साहू सहित विभिन्न जिला से आये काफी संख्या में लोग मौजूद थे.