JSSC CGL Exam Scam : JSSC सीजीएल परीक्षा घोटाले में CID ने सोमवार को बिहार के पटना जिले से एक आरोपित को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपित की पहचान राजन कुमार के रूप में हुई है, जो परमेश्वर प्रसाद का पुत्र है और बिहार के पटना जिले के नेवरा थाना क्षेत्र के श्री चंदपुर गांव का रहने वाला है. राजन कुमार पर आरोप है कि उसने कई अभ्यर्थियों को पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित एक होटल में ले जाकर परीक्षा के प्रश्न और उत्तर रटवाए थे. बताया जा रहा है कि इस तरीके से कई अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिनमें से कुछ परीक्षा में सफल भी हुए. इन लोगों की गिरफ्तारी और लगातार आ रहे नए तथ्यों से अब CID की जांच की दिशा बदल गई है. पूर्व में भी इस मामले की जांच हुई थी उस समय CID के डीजी अनुराग गुप्ता थे. उस समय इस मामले में 16 आरोपितों की गिरफ्तारी हुई, मगर तब पेपर लीक की पुष्टि नहीं हो सकी थी. उस जांच में यह सामने आया था कि पेपर लीक के नाम पर अभ्यर्थियों से अवैध वसूली की जा रही थी, असल में लीक हुआ ही नहीं था. पर इस बार जांच में CID के हाथ लगातार गए सुराग लग रहे हैं.
पूछताछ में खुल रहा पेपर लीक सिंडिकेट का राज
जांच में तेजी आते ही गिरफ्तार आरोपित एक-एक कर परीक्षा में पेपर लीक होने की बात कबूल करने लगे हैं. ऐसे में सीआइडी अब मान रही है कि पेपर लीक हुआ था. इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है, लगातार नई गिरफ्तारियां हो रही हैं. पिछले एक महीने में एसआईटी ने 11 सफल अभ्यर्थियों और आइसीएन से जुड़े कर्मियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पेपर लीक की बात स्वीकार की है. पहले गिरफ्तार हुए 16 अभ्यर्थी भी इसी सिंडिकेट से जुड़े पाये गये, जो पैसे वसूलने और अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब रटवाने वाले ठिकानों तक पहुंचाने का काम करते थे. अब तक 250 से अधिक अभ्यर्थियों और संदिग्धों के बयान दर्ज किये जा चुके हैं और पूछताछ रोजाना जारी है.
अभय तिवारी की गिरफ्तारी से बदली जांच की दिशा
टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी ने पूछताछ में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में हुई धांधली से पर्दा उठाया था. उसने खुलासा किया कि उसने खुद के साथ-साथ अपनी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी को परीक्षा पास कराने के लिए सीजीएल परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएल के संचालक मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये की रिश्वत दी थी. उसने यह भी बताया कि अन्य अभ्यर्थियों से भी 12 से 20 लाख रुपये तक वसूल कर उनकी 'सेटिंग' करायी गयी और उन्हें पास कराया गया. पूछताछ में सामने आया कि आरोपितों को बोकारो से लेकर नेपाल तक ले जाकर सवाल-जवाब रटवाए गए थे. जो 135 सवाल रटाए गए उनमें से 120 सवाल परीक्षा में हूबहू मिल गए.
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वेबेल को मिला था ठेका आइसीएन ने किया लीक
परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी एजेंसी वेबेल को दी गयी थी, जिसने सहयोगी एजेंसी आइसीएन की मदद ली. प्रश्नपत्र छपाई से चुकी है कि लीक आइसीएन की लेकर स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने का काम आइसीएनके पास था और CID जांच में यह पुष्टि हो तरफ से ही हुआ.
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