11वीं-13वीं JPSC नियुक्ति रद्द करने पर सरकार की दलील, ‘दोषी और निर्दोष को अलग करना मुश्किल’

राज्य सरकार ने JPSC की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया है. कार्मिक विभाग ने कहा है कि परीक्षा प्रणाली को रद्द करने का निर्णय प्रशासनिक है, न कि दंडात्मक.

JPSC Exam Scam: जेपीएसJPSC Exam Scamसी की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के मामले में राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया है. कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार की ओर से दाखिल शपथपत्र में सरकार ने कहा है कि 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि कथित तौर पर प्रभावित पूरी परीक्षा प्रणाली को रद्द करने से जुड़ा प्रशासनिक निर्णय है.

सरकार का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता का दायरा इतना व्यापक हो कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करना संभव न रह जाए, तो पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करना ही आवश्यक हो जाता है. सरकार ने अपने जवाब में परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े कई बिंदुओं का भी उल्लेख किया है. कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार ने आकांक्षा मिंज समेत 79 याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर रिट याचिका (डब्ल्यूपीएस संख्या 6515/2026) के संदर्भ में यह जवाब दाखिल किया है.

सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में गिनाईं कई कथित अनियमितताएं

सरकार ने अपने जवाब में परीक्षा प्रक्रिया, एजेंसी के चयन और डाटा प्रोसेसिंग से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया है. सरकार के अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया गया.

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मुख्य परीक्षा के बीच बदली गई एजेंसी

सरकार के अनुसार, 11वीं-13वीं जेपीएससी परीक्षा की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का काम शुरुआत में आइटीआइ लिमिटेड को दिया गया था. हालांकि, मुख्य परीक्षा के दौरान तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल खियांग्ते ने बिना टेंडर प्रक्रिया के नामांकन के आधार पर टीडीपीएल को काम सौंप दिया. सरकार के मुताबिक, इसके बाद कंपनी को डाटा प्रोसेसिंग, इंटरव्यू और अंतिम परिणाम तैयार करने की जिम्मेदारी मिली.

टीडीपीएल को लेकर भी सरकार ने उठाए सवाल

शपथपत्र में सरकार ने दावा किया है कि टीडीपीएल को अनियमितता और जवाबदेही की कमी के कारण जेएसएससी ने 20 मई 2025 को डी-एम्पैनल कर दिया था. सरकार के अनुसार, कंपनी के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामबीर सिंह उत्तर प्रदेश में परीक्षा घोटाले से जुड़े एक मामले में 2021 में गिरफ्तार हुए थे. इसके बावजूद जेपीएससी की ओर से कंपनी को बिना टेंडर नामांकन के आधार पर काम दिया गया.

ओएमआर और ऑन-स्क्रीन मार्किंग में छेड़छाड़ का आरोप

सरकार ने अपने जवाब में ओएमआर शीट में कथित हेरफेर, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में छेड़छाड़ और सॉल्वर गैंग के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया है. सरकार का आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष की मिलीभगत से उत्तर-कुंजी व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई. इसके अलावा ओएमआर शीट को सील किए बिना रखने और कंपनी पिकर टेक्नोलॉजी के माध्यम से उन्हें एडिटेबल बनाए रखने का भी दावा किया गया है.

लैपटॉप नष्ट करने और गिरफ्तारियों का भी जिक्र

सरकार के मुताबिक, 22 जुलाई 2026 को दर्ज प्राथमिकी संख्या 16/2026 के बाद तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल खियांग्ते ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से अपना लैपटॉप नष्ट कर दिया. सरकार ने अपने जवाब में बताया है कि मामले में तत्कालीन अध्यक्ष, उप परीक्षा नियंत्रक, टीडीपीएल के निदेशक और कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और वे न्यायिक हिरासत में हैं.

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परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के बीच संबंध का दावा

सरकार ने जेपीएससी की परीक्षाएं कराने वाली एजेंसियों बिनसिस, आईसीएन इंडिया, आईटीआई लिमिटेड और टीडीपीएल के बीच कथित संबंध का भी उल्लेख किया है. शपथपत्र में कहा गया है कि बिनसिस के निदेशक अरुण शर्मा को रांची जिले में परीक्षा अनियमितता से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया है. सरकार के अनुसार, वह वर्ष 2020 तक आईसीएन इंडिया से भी जुड़े रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

सरकार ने अपनी दलील के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के सुभाष चंद्र सिन्हा, ओ. चक्रधर, बैशाखी भट्टाचार्य और इंद्रप्रीत सिंह कहलों समेत कई फैसलों का हवाला दिया है. सरकार का कहना है कि जब परीक्षा में कथित धांधली का दायरा इतना व्यापक हो कि दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग करना संभव न हो, तब पूरी चयन प्रक्रिया रद्द करना आवश्यक हो सकता है.

हालांकि, इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट पहले ही 11वीं-13वीं जेपीएससी परीक्षा से हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी सरकारी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा चुका है. 15 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. मामले की अंतिम वैधता पर अभी अदालत का फैसला नहीं आया है.

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लेखक के बारे में

By पंकज त्रिपाठी,

प्रख्यात अभिनेता, ट्विटर
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