भैया दूज पर बंगाली इलाकों में दिखा परंपरागत उल्लास

जामताड़ा जिले और बंगाली बहुल क्षेत्र में भैया दूज का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और समृद्धि की कामना की, और भाइयों ने बहनों को उपहार दिए। बाजारों में मिठाइयों और उपहारों की खरीद-फरोख्त से चहल-पहल रही। बंगाली क्षेत्रों में चंदन का तिलक लगाना और पारंपरिक मंत्रोच्चारण के साथ दीर्घायु की कामना की गई। परिवारों में विशेष पकवान बनाए गए और सभी सदस्य मिलकर त्योहार का आनंद उठाए। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है और विभिन्न शहरों एवं गांवों में उल्लास के साथ मनाया गया।

By JIYARAM MURMU | October 23, 2025 7:13 PM

संवाददाता, जामताड़ा. जिले भर में गुरुवार को भैया दूज का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. सुबह से ही घर-घर में पूजा की तैयारियां चल रही थीं. बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं भाइयों ने भी अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति स्नेह व्यक्त किया. शहर के बाजार रोड, कायस्थपाड़ा, राजबाड़ी, दुमका रोड, न्यू टाउन, सर्खेलडीह, सहना, गायछांद सहित अन्य मुहल्लों में खास रौनक देखने को मिली. बाजारों में मिठाइयों और उपहार की खरीददारी से चहल-पहल रही. बच्चों ने भी इस त्योहार का भरपूर आनंद लिया. भैया दूज के मौके पर कई परिवारों में पारंपरिक पकवान बनाए गए. यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जाता है. लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और परिवारों में मिलन का माहौल देखने को मिला. …………………….. बंगाली बहुल क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया भैया दूज पर्व फोटो – 01: भाई को तिलक लगाते बहन प्रतिनिधि, बिंदापाथर. बंगाली बहुल क्षेत्र में भैया दूज पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. मान्यता के अनुसार बहनों ने भाई के कपाल पर चंदन का तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की. इस दौरान बहनों ने “भायेर कपाले पड़लो फोटा, यमेर द्वारे काटा. यमुना देय यम के फोटा आमरा दिलाम भाई के फोटा… ” कहते हुए शंख ध्वनि के साथ अपने बाएं हाथ की कनिष्ठा अंगुली से भाई के कपाल पर तीन बार चंदन का तिलक लगाया और दान, दुर्वा के साथ भाई की दीर्घायु की कामना की. प्राचीन मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीया के अवसर पर भाई को चंदन का तिलक लगाने पर वह दीर्घायु होता है. इसी मान्यता के अनुसार बंगाली बहुल क्षेत्र में दूर-दूर से बहनें अपने भाई के घर आकर इस पवित्र त्योहार में हिस्सा लेती हैं. पर्व के दौरान भाई और बहन दोनों ही एक-दूसरे को वस्त्र और अन्य सामग्री देते हैं तथा इस उत्सव को खुशनुमा बना देते हैं. भैया दूज के दिन बंगाली परिवारों में तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां बनाई जाती हैं, जिनका सभी सदस्य मिलकर आनंद उठाते हैं. भैया दूज को लेकर बिंदापाथर, गेड़िया, किशोरी, मझलाडीह, डुमरिया, मोहनपुर, तिलाकी, घाघर, खैरा, सालकुंडा, सुंदरपुर, बड़वा आदि गांवों में सुबह से ही उत्सव का माहौल रहा.

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