राजगद्दी को छोड़ प्रभु राम ने वनवास का रास्ता अपनाया….प्रभु धन्य हैं : अंकित महाराज
गांधी मैदान में सातवें दिन जारी रही श्रीरामकथा, एक मार्च को गांधी मैदान में होगी फूलों की होली
जामताड़ा. गांधी मैदान में श्रीराम कथा सातवें दिन बुधवार को जारी रही. इस अवसर पर कथावाचक अंकित कृष्ण महाराज की अमृतवाणी से भगवान श्रीराम की विभिन्न लीलाओं का गायन किया गया. कहा कि दशरथजी द्वारा दिए गए पहले वरदान में बताया कि भैया भरत को राज्याभिषेक और भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास. 14 वर्ष का ही वनवास क्यों भगवान का हुआ, इसके कई कारण बताये. कहा कि पहला कारण रावण की आयु अब 14 वर्ष ही शेष थी. दूसरा कारण बताया कि रघुकुल की राजगद्दी की मर्यादा थी कि उस राजगद्दी पर वही बैठेगा, जिसके जीवन में 14 वर्ष की तपस्या होगी. साथ ही भगवान के वन गमन के कई कारण बताए. कैकयी ने भगवान को वन और भरत को राज्य क्यों मांगा? कैकयी माता भरत का परीक्षण करना चाहती थी कि जिस भरत को मैंने अपनी कोख से जन्म दिया है, उस भरत के सामने जब राज्य और भगवान राम के चरण दोनों रखे जाएं, तो भरत किसको स्वीकार करता है. और मां ने देखा कि धन्य है भरत, जिसने राज्य पद को भी ठुकरा करके भगवान श्रीराम के चरण कमल की सेवा स्वीकार कर ली. इसके बाद केवट का सुंदर प्रसंग श्रवण करवा कर भक्तों को भक्ति भाव जीवन जीने की कला सिखायी. बताया कि मनुष्य का धर्म और मनुष्य का कर्म यही है कि हर प्रकार से मनुष्य प्रभु का भजन करे. प्रभु से संबंध होना ही सबसे श्रेष्ठ भक्ति है. बिना संबंध के भगवान की भक्ति नहीं हो सकती है. बताया कि 14 वर्ष में भगवान 12 वर्ष चित्रकूट में रहे और चित्रकूट में रहकर भगवान ने तपस्या की. नित्य भगवान कामदगिरि की परिक्रमा करके और साधु-संतों पर कृपा करके भक्तों को आनंद दिया. इस मौके पर मुख्य यजमान तरुण गुप्ता ने बताया कि समापन के दूसरे दिन एक मार्च को महाराज के सानिध्य में फूलों की होली राधे रानी के संग होगी. यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक होगी, उसके बाद भंडारा महाप्रसाद का कार्यक्रम होगा. मौके पर आशा गुप्ता, समिति के अध्यक्ष मोहन लाल वर्मण सहित अन्य थे.
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