महापुराण भक्ति, ज्ञान व वैराग्य का ग्रंथ रत्न है : कथावाचक

कुंडहित. पाथरचुड़ गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन होने से आसपास क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से भक्ति की अविरल धारा बह रही है.

कुंडहित. प्रखंड के पाथरचुड़ गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन होने से आसपास क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से भक्ति की अविरल धारा बह रही है. शाम ढलने के साथ ही पाथरचुड़ गांव में भक्त वैष्णवों की भीड़ उमड़ने लगी है. इस धार्मिक अनुष्ठान में वृंदावन धाम के कथावाचक सुबल कृष्णा ब्रह्मचारी महाराज ने महाभारत के द्वितीय पाठ कौरव व पांडव के युद्ध प्रसंग के बारे में वर्णन किया. उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्णा ने महाभारत की युद्ध में पांडवों को विजय दिलाई थी. इस युद्ध में पांडवों को सभी प्रकार की सहायता की थी, क्योंकि यह युद्ध धर्म सत्य एवं अधर्म के बीच था. अर्जुन ने भगवान के प्रति सब कुछ समर्पण किया था, जिस कारण श्री कृष्ण ने सभी तरह की सहायता कर पांडवों को युद्ध में विजय दिलाया था. इस दौरान करन-अर्जुन के युद्ध, पितामह भीष्म एवं द्रौपदी प्रसंग की भी प्रस्तुति दी. महाराज जी ने कहा कि जब-जब धर्म की हानी होता है तब तब भगवान अवतार लेकर धर्म का स्थापना करते हैं. कहा श्रीमद्भागवत गीता एक ऐसा धर्म ग्रंथ है जो मनुष्य को कर्म योगी बनने के लिए प्रेरित करता है. श्रीमद्भागवत गीता को सफलता का रहस्य बताया गया है. श्रीमद्भागवत भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का परमोपदेश ग्रंथ रत्न है. महाराज ने कहा कि हम लोगों को भगवान श्री कृष्ण के चरणों में सब कुछ समर्पण करना चाहिए. निश्चित ही भगवान श्री कृष्ण हम लोगों की रक्षा करेंगे. उपस्थित श्रोता-भक्त भावविभोर होकर कथा स्थल पर भक्ति से झूमते रहे.

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By JIYARAM MURMU

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